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मेरठ कांड: नहीं निकाला गया युवती का गर्भाशय

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मेरठ के खरखौदा गैंगरेप और धर्मांतरण की शिकार युवती के मामले में बृहस्पतिवार को नया खुलासा हुआ है। गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने पीड़िता की मेडिकल जांच के बाद बताया कि युवती का गर्भाशय नहीं निकाला गया।
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दूसरी तरफ, पीड़िता का कहना है कि उसकी एक फेलोपियन ट्यूब निकाली गई है। डॉक्टरों का कहना है कि फेलोपियन ट्यूब निकाली गई है या नहीं, इसका पता लेप्रोस्कोपी जांच से पता चलता है, जो कि जांच अभी नहीं हुई है।

युवती का केस देख रहीं फिजीशियन डा. संगीता गर्ग ने बताया कि पीड़िता की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। उसका एमआरआई कराया गया है, जिसमें पता चला कि उसका गर्भाशय सुरक्षित है। पीड़िता की ओवरी में सूजन है।
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पीड़िता ने बताई थी फेलोपियन ट्यूब निकाले जाने की बात

उसे एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि शरीर में दो फेलोपियन ट्यूब होती हैं। इनमें से पीड़िता एक फेलोपियन ट्यूब निकाले जाने की बात कह रही है। फेलोपियन ट्यूब हटने से भविष्य में कुछ समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन अभी कोई गंभीर बात नहीं है।

बता दें कि पीड़िता की हालत गंभीर होने के कारण उसे बुधवार दोपहर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां तीन चिकित्सकों का पैनल इलाज कर रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, अभी पीड़िता को दो-तीन अस्पताल में और रहना पड़ेगा।
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यशोदा अस्पताल नहीं लेगा इलाज का पैसा

पीड़िता के इलाज का पूरा खर्चा यशोदा अस्पताल प्रबंधन उठा रहा है। अस्पताल के डायरेक्टर पीएन अरोड़ा ने बताया कि युवती का पूरा इलाज मुफ्त में किया जा रहा है। किसी प्रकार का खर्चा किसी और से नहीं लिया जा रहा है।

वहीं, युवती के जीजा ने बताया कि उसके इलाज का खर्चा मेरठ के एसएसपी दे रहे हैं। बता दें कि बुधवार को पीड़िता से मिलने आए कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने भी वादा किया था कि वे पीड़िता के इलाज का खर्च देंगे।

बवाल और हंगामे के मद्देनजर यशोदा अस्पताल के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है। सिहानी गेट पुलिस के जवान तैनात हैं।
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