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मनीष हत्याकांड:  स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे हैं गैंगस्टर

Fri, 21 Oct 2016 11:59 AM IST
जितेंद्र राठी/अमर उजाला, गुड़गांव
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- फोटो : demo pic
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साइबर सिटी में गैंगवार के चलते गैंग दो ग्रुपों में बंटते नजर आ रहे हैं। अपने दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए गैंग के गुर्गे स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे हैं, जिससे दुश्मन को भी उनकी भनक नहीं लग पा रही है।
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इसका जीता जागता उदाहरण गैंगस्टर बिंदर गुर्जर के भाई मनीष उर्फ पप्पू और गैंगस्टर महेश अटैक की हत्या है। इन दोनों ही हत्याओं में एक चीज और कॉमन पाई गई हैं कि दोनों पर हमलावरों ने इतनी ज्यादा गोलियां बरसाई कि जिससे उनके जिंदा रहने के चांस एक फीसदी भी न रहें।

इन दोनों ही हत्याओं में गैंग में शामिल रहे सदस्यों ने बड़े ही सामान्य तरीके और निडर होकर घटनास्थल की रेकी की। बिंदर गुर्जर से जुड़े माने जाने गैंगस्टर महेश अटैक की हत्या से पहले झाड़सा गांव में उसके कार्यालय के बाहर एक सप्ताह तक कौशल गैंग के सदस्य ने रेकी की थी।
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वह इस दौरान वहां सामान्य तरीके से रहकर महेश की हर हरकत पर नजरें गड़ाए हुए था। जब पूरी तरह से यह साफ हो गया कि रोजाना शाम के समय महेश अटैक के कार्यालय से निकलने का समय क्या है, उसी के बाद उसकी हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस वारदात में शामिल बदमाशों ने महेश पर 15 से अधिक गोलियां बरसाई थी।

इसी प्रकार मनीष की हत्या के लिए भी स्लीपर सैल की तरह ही काम किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कई दिनों से मनीष उर्फ पप्पू के अपने शराब ठेके पर देर रात कलेक्शन के लिए आने और जाने के समय पर ध्यान रखा जा रहा था।

यह भी नजर रखी जा रही थी कि वह किस गाड़ी में और कितने लोगों के साथ आता है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि सोमवार की रात मनीष की हत्या किए जाने से पहले ये बदमाश कस्टमर बनकर शराब ठेके पर पहुंचे थे और वहां खड़े होकर इत्मीनान से बीयर भी पी थी।

इनमें से कुछ दो बाइकों पर तो कुछ एक कार में सवार होकर ठेके पर पहुंचे थे। इन्होंने वहां किसी को भी इतनी भनक नहीं लगने दी कि यह किसी खतरनाक सोच के साथ यहां आए हैं।
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