पुलिस महिला का फोटो निकालकर आसपास के इलाके में उसकी पहचान करने में जुट गई। पुलिस को जल्द ही पता चल गया कि महिला सैयद कॉलोनी बवाना निवासी सोनिया है।
पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा, जहां दरवाजे पर ताला लगा था। आसपास रहने वालों ने बताया कि सोनिया को एक दिन पूर्व देखा गया था।
पुलिस को जानकारी मिली कि वह मूलत: उत्तर प्रदेश के हरदोई की रहने वाली है। बवाना में उसका पति फैक्टरी में काम करता है, जबकि वह घरों में साफ सफाई करती है।
पुलिस ने सोनिया के फोन को सर्विलांस पर लगाया। सोनिया लगातार ठिकाना बदल रही थी। 25 फरवरी की शाम पुलिस ने सोनिया को आनंद विहार बस अड्डे से गिरफ्तार कर लिया।
सोनिया ने बताया कि इंद्राज कॉलोनी में रहने वाली एक महिला रजनी ने उसे बच्चे को अगवा करने के लिए कहा था। इसकी एवज में उसने उसे 45 हजार रुपये दिए।
पुलिस ने सोनिया के पास से 42 हजार रुपये बरामद कर लिए। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर रजनी और साजिश में शामिल उसके भतीजे सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया।
रजनी से पूछताछ में पता चला कि रजनी की एक बहन संतोष बहादुरगढ़ में रहती है। वर्ष 2015 में आग में झुलसने से संतोष के बच्चे की मौत हो गई थी। संतोष ने रजनी को एक बच्चा गोद दिलाने के लिए कहा था।
रजनी ने अपने भतीजे के साथ मिलकर साजिश रची। वह बहन को सरप्राइज देना चाहती थी। उसने सोनिया को सुखराम के बच्चे को चुराने के लिए तैयार किया और उसे इसकी एवज में 45 हजार रुपये देने की बात कही।