हाईकोर्ट ने करीब चार वर्ष पूर्व महिला से रेप मामले में 10 वर्ष की कैद की सजा पाए व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि दोनों लिव इन रिलेशन में रह रहे थे और महिला बार-बार अपने बयान बदल रही है।
ऐसे में रेप के आरोप संबंधी बयान को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने सजा संबंधी निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पेश दस्तावेज पर सही परिप्रेक्ष्य में विचार नहीं किया है।
दस्तावेज से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता महिला अपने पति से अलग होकर दिल्ली में अकेली रह रही थी। इसके बाद वह आरोपी के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी।
अदालत ने कहा कि महिला बार-बार अपना बयान बदल रही है उसने स्वयं माना कि वह आरोपी के साथ रह रही थी। दूसरी तरफ उसने शिकायत में कहा है कि जब वह सो रही थी तो अचानक आरोपी उसके कमरे में दरवाजा खुला होने पर आया व धमकी देकर रेप किया।