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ऑटो में सुरक्षित नहीं छात्राओं का सफर ऑटो चालक कई घटनाओं को दे चुके हैं अंजाम

Fri, 06 May 2016 09:17 AM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

  • ऑटो चालक कई घटनाओं को दे चुके हैं अंजाम
  •  अपहरण और रेप के प्रयास की हुई हैं घटनाएं
  •  सत्यापन प्रक्रिया भी नहीं हो पाई है पूरी
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ऑटो में हो रहा छात्राओं का अपहरण - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नोएडा में ऑटो चालक और उसके दोस्तों द्वारा किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद जिले में ऑटो से चलने वाली छात्राओं की सुरक्षा का मसला एक बार फिर उठने लगा है। ऑटो चालकों द्वारा यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी तरह की दो घटनाएं ग्रेटर नोएडा में भी हुई हैं
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साल 2011 में एक छात्रा ने परी चौक से ऑटो किराये पर लिया तो अंधेरे का लाभ उठाकर चालक उसे कासना के जंगल में ले गया। वहां दोस्तों संग सामूहिक दुष्कर्म किया। साल 2013 में अपने मंगेतर से दिल्ली से मिलने आई छात्रा के साथ एक चालक ने दुष्कर्म किया था।

ऑटो में सवारी बनकर पहले से बैठे बदमाश भी कई वारदात कर चुके हैं। नशे में ऑटो चलाना, गलत व्यवहार और जानबूझ कर अनजान व लंबे रास्तों से सवारियां ले जाने के चलते छात्राएं अपने आप को असुरक्षित मान रही हैं। 
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इन बातों का रखें ध्यान
ऑटो में बैठने से पहले मोबाइल से ऑटो की नंबर प्लेट का फोटो ले लें।  ऑटो का कोड नंबर याद रखें। जहां तक हो सके रात में अकेले सफर करने से बचें। अगर जाना ही है तो दो या दो से अधिक एक साथ चलें। ऑटो में बैठने के दौरान अपने नजदीकियों के नंबर डायरी बुक में रखें जिससे तुरंत सूचना दी जा सकें।


ग्रेनो में ऑटो चालकों का इतना खौफ है कि यदि कोई छात्रा अपनी मर्जी से किसी ऑटो में बैठना चाहती है तो वह स्वयं नहीं बैठ सकती है। कई बार तो ऑटो चालक छात्राओं का हाथ पकड़कर खींचकर ले जाते हैं, जिससे ग्रेनो में छात्राएं ऑटो चालकों से असुरक्षा महसूस करती हैं।
- सलोनी अग्रवाल, गलगोटिया कॉलेज (छात्रा)

यहां ऑटो में चलना किसी खतरे से कम नहीं है। ऑटो चालकों के बोलचाल का रवैया बेहद गलत है। ऑटो में कई बार उन्हीं के साथी बैठे हुए होते हैं और ऐसी हालत में वह छात्रा को लेकर चल देते हैं जिससे वह रास्ते में अश्लील कमेंट भी करते हैं। इसे सुधारने के लिए पुलिस को कदम उठाना पड़ेगा।
- आरती, एक्यूरेट कॉलेज की छात्रा

जिस शहर की तुलना सिंगापुर से की जाती हो वह इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से सही है लेकिन यहां पर उसके 10 फीसदी भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। रात को बात ही दूर दिन में भी ऑटो से यात्रा करना छात्राओं के लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए हरेक चालक का सत्यापन हो और उन्हें कार्रवाई का डर हो तो इस तरह की घटना ही न होंगी।
- ज्योत्सना राय, छात्रा, शारदा यूनिवर्सिटी 

छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए हर कॉलेज, मॉल, अस्पताल और ऐसे मुख्य स्थानों पर पुलिस अफसरों के नंबर लिखे होने चाहिए। छात्राओं की समस्याओं के लिए महिला पुलिस की एक टीम बनाई जाए और उनका नंबर हरेक कॉलेज की छात्राओं को मुहैया कराया जाए।
- साची त्यागी, छात्रा, एनआईईटी 

क्या कहते हैं शहरवासी
नॉलेज पार्क में हजारों की संख्या में छात्राएं पढ़ती हैं लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस या कॉलेज प्रबंधनों ने कोई व्यवस्था नहीं की है। ऐसी कोई प्रणाली बनाई जाए कि छात्राएं यदि किसी मुसीबत में हो तो दो से पांच मिनट के अंदर पुलिस पहुंच सकें।
- राजेंद्र बंसल, बीटा-वन

हर ऑटो पर एक कोड नंबर लिखा है कोई भी छात्रा बिना कोड नंबर के ऑटो में यात्रा न करें। यदि कोई चालक अभद्रता करता है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
 - आलोक सिंह, एक्टिव सिटीजन टीम


ऑटो चालकों का वेरीफिकेशन दो साल पहले किया गया था मगर एक बार फिर से सत्यापन कराना शुरू कर दिया है। एक ऐसे मोबाइल ऐप बनाने पर काम चल रहा है जिससे ऑटो का नंबर या कोई तीन डिजिट मिल जाए तो ऑटो और उसके चालक की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी। इसके अलावा चालकों की काउंसलिंग भी की जाएगी।
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 - अभिषेक यादव एसपी देहात ।
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