‘यदि लख्तेजिगर को जिंदा देखना चाहते हो तो पांच करोड़ रुपये का इंतजाम कर लो नहीं तो जिंदगी भर मुंह देखने को भी तरस जाओगे। अगर पुलिस को इत्तला करने की जुर्रत की तो रकम दोगुना हो जाएगी और रुपये नहीं दिए तो बेटे की मौत पाओगे।’
यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है, भांजे का अपहरण करके बदमाश पिता से इसी तरह पांच करोड़ रुपये मांगते। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि एमिटी के छात्र का अपहरण करके पिता से उर्दू में फिरौती मांगी जानी थी।
अभिलाष व पप्पू ने योजना बनाई थी कि वह छात्र के सामने नहीं आएंगे। पहचान न हो इसके लिए उन्होंने उर्दू भी सीखी थी और बाकायदा इसके लिए एक डायरी में अभ्यास करके फिरौती की कॉल के लिए स्क्रिप्ट लिखी थी।
अपहरण करने के दौरान सबसे बड़ा हथियार बदमाशों का क्लोरोफार्म था। जिसे बात करने के बहाने सुंघाते और कार में डालकर ले जाते। यदि वह भी काम न करता तो मिर्ची स्प्रे का प्रयोग किया जाता।
युवक को लखनऊ ले जाकर ही रकम मांगी जानी थी। पहचान उजागर होने पर फिरौती लेकर मौत के घाट उतारने की साजिश रची गई थी। वह युवक का अपहरण करके उसे नशीली गोलियां खिलाते और ड्रिप लगाकर बीमार दिखाकर यमुना एक्सप्रेसवे लखनऊ तक ले जाते।
इसके बाद उसे लखनऊ पीजीआई ले जाने के बहाने अपने ठिकाने तक ले जाते। वैगनआर कार से अपहरण करने से पहले बदमाश गाड़ी की नंबर प्लेट बदल देते। रास्ते के लिए भी अलग से एक-एक नंबर प्लेट बनवा रखी थी, ताकि किसी भी शहर में उनकी कार का नंबर न आ पाए।
फिरौती की रकम में से 80 लाख रुपये साथियों को दिए जाने थे। बाकी रुपये से कपड़ा फैक्टरी को मजबूत करने और नया घर व नई कार का सपना पूरा किया जाना था।