सामान्य ज्ञान की बात है कि वर्तमान में वैवाहिक विवाद मामलों यानि दिवानी व आपराधिक कानून पति के खिलाफ है। यदि पत्नी राहत पाने के लिए इनका सहारा नहीं लेती तो स्पष्ट है कि वह अपने वैवाहिक जीवन को बचाने का हरसंभव प्रयास कर रही है।
बावजूद इसके पति उस पर क्रूरता का आरोप लगाता है तो यही माना जा सकता है कि विवाह को तोडना चाहता है। हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगा कर तलाक मांगने वाले पति की याचिका खारिज करते हुए की।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजयोग व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी पर मात्र क्रूरता के आरोप लगाने मात्र से तलाक का आधार नहीं बन जाता बल्कि पति को भी साबित करना जरूरी है कि उसने अपने वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए प्रयास किए। यदि ऐसा नहीं है तो तलाक का कोई आधार नहीं बनता।
खंडपीठ ने पति द्वारा लगाए गए उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया कि पत्नी विवाह के दूसरे दिन से ही उसे व परिवार के सदस्यों को प्रताड़ित करने लग गई थी। वह आधुनिक व शिक्षित समझने के अलावा उनके परिवार को ग्रामीण पृष्ठभूमि का बताते हुए गंवार समझती थी।
पति ने पत्नी पर लगाया था अवैध संबंधों का आरोप
कोर्ट, कंज्यूमर फोरम
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इतना ही नहीं पेशे से शिक्षिका हर शनिवार व रविवार को घर का काम संभालने की अपेक्षा बहाना बनाकर दोस्तों के साथ घूमने चली जाती थी। इसके अलावा उस पर भाभी से अवैध संबंधों का आरोप तक लगा दिया था।
खंडपीठ ने कहा कि दोनों का विवाह 22 नवंबर 2004 को हुआ व एक जनवरी 2006 को बेटे ने जन्म लिया। अदालत ने कहा कि सभी तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि जब याची की पत्नी को उसके माता-पिता ने प्रसव के चलते नर्सिग होम में भर्ती करवाया तो सूचना मिलने के बाद भी वह या उनके परिवार का कोई सदस्य वहां नहीं गया बल्कि बच्चें के जन्म के अगले दिन वहां गए।
खंडपीठ ने कहा कि ऐसे समय में पत्नी को पति का उपस्थिति की ज्यादा जरूरत होती है। ऐसा नहीं है कि आपरेशन की स्थिति में वह स्वयं चाकू लेकर सर्जरी करता लेकिन पत्नी के मन में सुखद स्पर्श तो दे ही सकता था।
याची अगले दिन एक मेहमान की तरह गया जिससे पत्नी के मन में कडवाहट बढ़ी और रिश्तों की खाई चोडी हो गई। याची ऐसे समय में न तो कोई सरकारी डयूटी कर रहा था न ही कोई सामाजिक दायित्व निभा रहा था।
कोर्ट ने तलाक मांगने संबंधी याचिका की खारिज
मुकदमा
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खंडपीठ ने कहा कि याची को यह तक नहीं पता कि उसका बच्चा किस कक्षा में पढ़ रहा है, वह कुछ राशि देकर बच्चे के बेहतर परवरिश में योगदान दे सकता था।
इससे याची के पत्नी व बच्चे के प्रति उदासीन रवैये का पता चलता है। दूसरी तरफ पत्नी अकेले ही बेटे की देखभाल कर रही है जिससे पता चलता है कि वह हर हाल में वैवाहित संबंध को बचाना चाहती है।
इसी प्रकार वर्तमान में वैवाहिक विवाद मामलों में सभी कानून पति के खिलाफ है, इसके बावजूद पत्नी ने आठ वर्ष अलग रहने के दौरान एक बार भी कोई शिकायत तक दर्ज नहीं करवाई।
वहीं दूसरी तरफ पति उस पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाकर तलाक चाहता है। ऐसे में उनका मानना है कि यह क्रूरता नहीं है और वह तलाक का हकदार नहीं है।