फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'आम की पेटी' बताकर सप्लाई की जाती हैं जवान लड़कियां

विज्ञापन
विज्ञापन
लड़कियों की तस्करी के आरोप में पत्नी सहित गिरफ्तार हुआ पन्ना लाल महतो झारखंड से लड़कियां लाकर पूरे देश में सप्लाई करता था। वह बड़े ही शातिर अंदाज में यह नेटवर्क चला रहा था।
विज्ञापन


पुलिस के अनुसार, महतो जवान लड़कियो और लड़कों को 10 से 15 हजार रुपए में झारखंड, बिहार और बंगाल समेत कई छोटे राज्यों से खरीदकर लाता था।

लड़कियों की तस्करी करने वाले लोग हमेशा ट्रेन में सफर करते थे और दिल्ली आकर महतो के ऑफिस में 'आम की पेटी' (खरीदी गई लड़की) को बेच देते थे। हर जवान लड़की की तस्करी के लिए यही कोड वर्ड इस्तेमाल किया जाता था।

लड़की की 'ना' पर होता था ये सुलूक

झारखंड पुलिस के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, महतो पिछले कई सालों से बेहद व्यवस्थित ढंग से यह धंधा चला रहा था। उसने अब तक कम से कम 5000 लड़कियों को घरेलू काम के बहाने नौकरी का झांसा देकर वेश्यावृत्ति या फिर जबरन शादी करवाने के बाद बेच दिया।

उसके काम करने का ढंग काफी सहज था। दिल्ली एनसीआर में घरेलू कामकाज के लिए बड़ी संख्या में नौकरानियों की मांग है, इसीलिए महतो जवान लड़कियों को दिल्ली लाता था।

लेकिन जब कोई लड़की काम करने से मना कर देती थी तो वह उसे पंजाब और हरियाणा में ऐसे लोगों के हाथों बेच ‌देता था जिनकी शादी नहीं हो रही होती। वह एक अंतर्राज्यीय धंधा चला रहा था जिसमें झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने भी उसकी पूरी मदद की।

वीडियो दिखाकर फंसाते थे

अधिकारियों ने बताया कि इस रैकेट में महतो की मदद करने वाले छोटे तस्कर झारखंड के आदिवासी इलाकों की लड़कियों और बच्चों को फंसाते थे। ऐसे इलाकों में लोगों की आमदनी कम होती है और बेरोजगारी ज्यादा। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोग एक या दो बच्चों के खो जाने ‌बाद जरा भी चिंता नहीं करते।

यही नहीं, इन इलाकों के बच्चे भी पैसे और काम की चाहत में बड़े शहरों में बसना चाहते हैं। तस्कर इसी बात का फायदा उठाते हैं और उन्हें बड़े शहरों की चमचमाती सड़कें, ऊंची बिल्डिंग और शानो-शौकत के वीडियो दिखाते हैं, जिनसे वे जल्द प्रभावित हो जाते हैं।

तस्करी करने वाले लोग उन्हें दिल्ली और आसपास के शहरों में बसने के सपने दिखाते हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक बार बच्चे को भरोसे में लेने के बाद वे उन्हें रांची में बेहद सुरक्षित घरों में रखते थे।
विज्ञापन

दिल्ली के इस स्टेशन से होती है तस्करी

जब वे इस बात से आश्वस्त हो जाते हैं कि बच्चे की गुमशुदगी के बारे में कहीं कोई शिकायत नहीं है तब वे उसे एक‌ नया नाम देते हैं ताकि कभी भी पकड़े जाने से बच जाएं। इसके बाद उन्हें ट्रेन से दूसरे शहरों में भेजा जाता था।

कम उम्र के बच्चे के साथ किसी महिला को भेजा जाता था जोकि उसकी मां या परिचित होने का नाटक करती थी। दिल्ली में आने वाले सबसे ज्यादा बच्चे आनंद विहार रेलवे स्टेशन ‌के जरिए पहुंचते हैं। स्टेशन से उन्हें महतो के पास ले जाया जाता था।

वह बच्चों को एक हॉस्टल में रखता था जोकि उसकी प्लेसमेंट एजेंसी में ही बना था। महतो करीब 40 हजार रुपए के सालाना कमीशन पर लड़कियों को दिल्ली और एनसीआर के शहरों में बेचता था। घरेलू नौकरानी के तौर पर काम करने वाली लड़की को मात्र 3000 रुपए तक मासिक वेतन मिलता है।

(साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें