हाईकोर्ट ने रोहिणी में विजय विहार स्थित आश्रम में नाबालिग लड़कियों व महिलाओं के यौन शोषण के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर भगवान के नाम पर लड़कियों व महिलाओं को बंधक बनाकर रखे जाने के आरोपों में जरा भी सचाई है, तो यह बेहद खतरनाक है।
विज्ञापन
विशेष जांच दल बनाने का निर्देश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सीबीआई निदेशक को विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि एसआईटी इस मामले में जुड़े दस्तावेज, पुलिस में दर्ज एफआईआर व डीडी एंट्री अपने कब्जे में लेगी।
इसके अलावा आश्रम में लड़कियों व महिलाओं के संबंध में सभी दस्तावेज भी कब्जे में लेगी। दिल्ली पुलिस को सीबीआई का सहयोग करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने सीबीआई को दिल्ली में दर्ज एफआईआर व डीडी इंट्री की जांच करने और यूपी के महाराजगंज व अन्य स्थानों पर दर्ज एफआईआर का स्टेट्स बताने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
17 जनवरी, 2018 को स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। कोर्ट ने आश्रम के संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित को निरीक्षण के दौरान पुलिस का सहयोग करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली पुलिस पर उठाया सवाल
वीरेन्द्र देव दीक्षित
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस पर उसे भरोसा नहीं है। इन लड़कियों के माता-पिता ने पुलिस को शिकायतें दीं, जिन पर एफआईआर हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां पर कई राज्यों की लड़कियों को बंधक बनाकर रखा गया है।
लड़कियों को दे रहे हैं नशीला पदार्थ
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कोर्ट को बताया कि आश्रम में अश्लील पत्र, हजारों सीरींज व नशीली दवाएं व सीडी मिली हैं। यह पत्र वहां बंधक लड़कियों से आश्रम चलाने वाले वीरेंद्र दीक्षित को लिखवाए गए।
इसके अलावा वहां पर लड़कियों को कमरों में बंद करके रखा गया है। इनमें से ज्यादातर लड़कियां नशीली दवाओं का सेवन करने वाली दिख रही थीं। इन लड़कियों को खाने पीने की चीजों में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया जा रहा है। उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है।
महिला वकील को बाल पकड़कर खींचा
baba virendra dev dixit
कोर्ट के समक्ष टीम की सदस्य महिला वकील ने कहा कि उसे आश्रम में बाल पकड़कर खींचा गया और मारपीट की गई। बिल्डिंग में चार मंजिल हैं और उसके साथ दूसरी बिल्डिंग है। इन दोनों के बीच सुरंग होने की बात सामने आई है।
दूसरी बिल्डिंग में केवल लड़कों को रखने की बात कही गई। जब विवरण मांगा गया, तो एक रजिस्टर दिया गया, लेकिन यह विजिटर रजिस्टर था। इस रजिस्टर में केवल पुरुष आगंतुकों के बारे में ही लिखा हुआ था। इस रजिस्टर को कब्जे में ले लिया गया है।
एमसीडी करेगी इमारतों का निरीक्षण
कोर्ट ने इन दलीलों के मद्देनजर एमसीडी को इन दोनों बिल्डिंगों का निरीक्षण करने और संबंधित दस्तावेज की जांच व कार्रवाई का निर्देश दिया है। वहां पर बंधक करीब 150 लड़कियों व महिलाओं का विवरण बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा बाल कल्याण समिति को आश्रम में दौरा करने और नाबालिग लड़कियों की पहचान कर उन्हें वहां से निकालने के लिए कहा है।
खंडपीठ ने आश्रम में बंधक लड़कियों व महिलाओं के इलाज के लिए दो डॉक्टरों का पैनल बनाने का निर्देश दिल्ली सरकार के प्रधान स्वास्थ्य सचिव को दिया है। यह डॉक्टर हर सप्ताह आश्रम का दौरा करेंगे और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती करवाएंगेे।
आश्रम के वकील ने आरोपों को किया खारिज
इस मामले में आश्रम की ओर से पेश हुए वकील अमोल पोपने ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। अमोल ने कहा कि यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है और वहां पर आध्यात्म की पढ़ाई होती है।
यहां पर कुछ भी गलत नहीं हो रहा है। जो लोग यहां पर हैं, वह अपनी मर्जी से हैं। यहां इलाज की पूरी व्यवस्था है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप वकील हैं, लेकिन आश्रम के प्रचारक की तरह बात कर रहें हैं।
अगर कुछ भी गलत नहीं है, तो फिर लड़कियों को कैद करके क्यों रखा गया है। वहां इतने सारे दरवाजे, ताले और ग्रिल क्यों हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर आप गलत नहीं हैं, तो दिल्ली महिला आयोग और बाल कल्याण समिति के साथ जाएं और उनका सहयोग करें।
निरीक्षण की वीडियोग्राफी करवाई
हाईकोर्ट ने एनजीओ ‘फाउंडेशन फॉर सोशल एम्पावरमेंट’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को स्वाति मालीवाल, दिल्ली पुलिस व दो वकीलों की टीम बनाकर आश्रम का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।
इस पूरे निरीक्षण की वीडियोग्राफी करवाई गई है। याचिका में कहा गया है कि आश्रम में कई नाबालिग लड़कियों व महिलाओं को जबरन बंधक रखा हुआ है। इनमें कई लड़कियां 14 साल से आश्रम में कैद हैं। इस आश्रम के खिलाफ 11 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से सात दुष्कर्म की हैं। आश्रम में कैद कई लड़कियां खुदकुशी कर चुकी हैं, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।