हाईकोर्ट ने मोती नगर के पूर्व थानाध्यक्ष को राहत दी है। अदालत ने उन पर रेप, मारपीट इत्यादि का तुरंत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा मजिस्ट्रेट इस संबंध में शिकायतकर्ता की याचिका पर कानून के तहत सुनवाई कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति एके पाठक ने अपने फैसले में महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने पूर्व थानाध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। महिला ने तर्क रखा था कि रेप व धोखाधड़ी के मामले में मजिस्ट्रेट को जांच करवाने का अधिकार नहीं है बल्कि तय नियम है कि ऐसे में मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति ने कहा कि हर मामले में परिस्थितियों को देखना जरूरी है। मजिस्ट्रेट को सभी तथ्यों व साक्ष्यों को देखकर निर्णय लेना होता है। इस मामले में याची ने अत्यधिक देरी से मामला दर्ज करवाया और यह भी देखना जरूरी है कि आखिर देरी क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट याची द्वारा पेश गवाहों के बयान दर्ज कर रहे हैं और पूरी प्रक्रिया के बाद वे तय करेंगे कि मामला बनता भी है या नहीं। ऐेसे में वे याचिका खारिज करते हैं।