आंकड़ों के मुताबिक मेवात क्षेत्र में प्रत्येक साल दो दर्जन विवाहिताओं की दहेज को लेकर हत्याएं होती हैं। इस साल अब तक 427 मामले केवल दहेज प्रताड़ना के दर्ज हुए हैं। पिछले दो वर्षों में दहेज उत्पीड़न के 483 मामले थे। दहेज लेन देन के चलते इस वर्ष 27 तलाक हो चुके हैं। ऐसे अनगिनत मामले भी हैं जिनमें मोबाइल, व्हाट्सऐप और आमने-सामने तीन तलाक एक साथ बोलकर रिश्ता तोड़ लिया गय।
पिछले तीन दिनों से दिल्ली की संस्था सहेली की टीम ने मेवात क्षेत्र में दहेज का दंश झेल रही महिलाओं से दर्जनों गांवों में पहुंचकर मुलाकात की। यही सामने आया है कि दहेज लाने में नाकाम महिलाएं हारकर मौत को गले लगा लेती हैं तो कुछ ऐसी भी हैं जो पति के नाजायज संबंधों और दहेज की मांग पूरी न होने पर तलाक का शिकार हो जाती हैं।
देहात और शहरों से मिले आंकड़े यह भी बताते हैं कि मेवात क्षेत्र में गरीबी के बावजूद हरियाणा प्रदेश में सबसे ज्यादा दहेज लिया-दिया जाता है। दर्जनों ऐसे गरीब घर मिले, जिनमें कई-कई जवान बेटियां केवल इसलिए शादी होने से वंचित हैं क्योंकि मां-बाप के पास इतना धन नहीं है कि वह दहेज का सामान और गाड़ी दे सकें। कुुछ बेटियां ऐसी भी हैं जिनके दहेज लेने-देने के डर से बाली उम्र में ही हाथ पीले करने पड़ते हैं, ऐसा करने पर ये लोग मजबूर हैं।