दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने छत्तीसगढ़ पुलिस की अपराध शाखा के साथ मिलकर मोबाइल टॉवर लगाने के नाम पर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में दो गिरोह सरगना समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने ठगी के लिए रोहिणी में कॉल सेंटर खोल रखा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी हर महीने 70 हजार कमाने का लालच देकर मोबाइल टॉवर लगाते थे।
अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव के अनुसार, छत्तीसगढ़ की अपराध शाखा ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से संपर्क साधा था कि छत्तीसगढ़ में मोबाइल टॉवर लगाने के नाम पर ठगी के काफी मामले सामने आए हैं। आरोपी दिल्ली में इस रैकेट को टेलीकॉम के जरिए फर्जी आईडी से लिए गए मोबाइल नंबरों से चला रहे हैं।
पुलिस को जांच में पता चला कि जिन नंबरों से पीड़ितों को कॉल किए जाते हैं, वे फर्जी आईडी से लिए गए हैं। वहीं बैंक खाते भी फर्जी आईडी से खोले गए हैं। पुलिस ने तुरंत ही फर्जी खुलवाए गए खाते व एटीएम को बंद करवा दिया। साथ ही सभी बैंकों के मैनेजर को इस बारे में बता दिया था।
इस दौरान पुलिस टीम ने दीपक कुमार नाम के आरोपी को 29 अप्रैल को उस समय पकड़ लिया, जब वह पटेल नगर स्थित एसबीआई की ब्रांच में बंद खाते की जानकारी लेने आया था। उसने बताया कि वह गुड्डू के लिए काम करता है और उसके द्वारा किए गए फर्जी आईडी पर बैंक खाते खुलवाता है।
उसकी निशानदेही पर रोहिणी निवासी गुड्डू उर्फ दिनेश गुप्ता व उसके दो साथी राम अवतार गुप्ता और विनीत को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद राम अवतार की निशानदेही पर साथी मानव व अमित कुमार को भी पुलिस ने दबोच लिया। अमित खुद को चार्टर्ड एकाउंटेंट बताता था।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर सेक्टर-9 रोहिणी में चल रहे कॉल सेंटर से दो कंप्यूटर, 15 फर्जी चुनाव आईडी कार्ड, 15 पेन कार्ड, 13 एटीएम कार्ड, 12 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, चेक बुक और फर्जी स्टाप बरामद किया। वहीं रानी बाग स्थित अमित के ऑफिस से एक लैपटॉप, आठ चुनाव आईडी कार्ड, 18 पेन कार्ड, दो लाइसेंस, चार मोबाइल फोन व सिम बरामद किए।
आरोपी ऐसे करते थे ठगी
आरोपी समाचार पत्रों में घरों की छतों पर मोबाइल टॉवर लगाकर अच्छी कमाई करने का विज्ञापन देते थे। ये लोगों को हर महीने 70 हजार रुपये कमाने का झांसा देते थे। जब कोई इनसे संपर्क करता था तो ये फर्जी ई-मेल के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहते थे।
इसके बाद 2500 से तीन हजार रुपये फीस के तौर पर बैंक में जमा करने के लिए कहते थे। जब लोग फीस जमा करा देते तो फिर से 2500 से तीन हजार रुपये जमा कराने के लिए कहते थे। जैसे ही पैसे आते, तुरंत आरोपी निकाल लेते थे। इसके बाद सिक्यूरिटी मनी के नाम पर 25 हजार जमा करवा लेते थे। ये पीड़ित को तब तक पैसा जमा कराने के लिए कहते, जब तक पीड़ित पैसा जमा कराना बंद न कर दे।
दूसरे राज्यों के लोगों को बनाते थे निशाना
आरोपी दूसरे राज्यों के लोगों को अपना निशान बनाते थे ताकि वह शिकायत करने दिल्ली न पहुंच सकें। पुलिस ने फर्जी खातों से खोले गए 23 बैंक खातों को बंद कराया है। ये साथ में लोगों को परिवार के एक सदस्य को कंपनी में नौकरी लगवाने का झांसा भी देते थे।
फिर जल्द से जल्द अपना मोबाइल नंबर बदल लेते थे। फर्जी आईडी अमित व विशाल तैयार करते थे। एक फर्जी आईडी तैयार करने के लिए उन्हें दो हजार रुपये मिलते थे। दीपक, विनीत, मानव और अमित फर्जी आईडी से बैंक खाते खुलवाते थे। उन्हें एक खाता खुलवाने के दो हजार रुपये मिलते थे। मानव हरियाणा और विनीत उत्तर प्रदेश राज्य के लोगों द्वारा बैंक में जमा कराए गए पैसों को निकालने का काम करते थे।
गिरोह सरगना पहले भी हो चुके हैं गिरफ्तार
पूछताछ में पता चला कि लगा कि राम अवतार गुप्ता व दिनेश गुप्ता इस गिरोह के सरगना हैं। दिनेश को कॉल सेंटर की अच्छी जानकारी है। रामअवतार कंप्यूटर का अच्छा जानकार है। दोनों आरोपी वर्ष 2012 में जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं।