प्राधिकरण के पूर्व ओएसडी यशपाल त्यागी के यहां आयकर विभाग ने छापा डालने से पहले उनके घर के आसपास लोगों से बातचीत भी की थी, लेकिन लोगों ने बताया था कि त्यागी किसी से ताल्लुकात नहीं रखते। इसके बाद टीम ने प्राधिकरण के ही ऐसे कर्मचारी और अधिकारियों से पूछताछ की थी, जो यशपाल के बारे में काफी कुछ जानते थे।
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि यशपाल के बारे में छापे से पहले काफी सबूत जमा कर लिए गए थे। जब वह प्राधिकरण में तैनात थे, तब भी किसी से मिलते नहीं थे और घर के आसपास भी किसी से बात नहीं करते हैं। उन्हें डर रहता था कि कहीं उनके कामों का राज कोई जान न ले। हर जिम्मेदारी दूसरों पर डालने के फिराक में रहते थे।
यशपाल की जानकारी आयकर विभाग के साथ-साथ प्रदेश सरकार के पास भी पहुंच चुकी है। प्राधिकरण में उनकी तैनाती के वक्त और बाद में जितनी भी शिकायतें प्रदेश सरकार के पास आई थीं, उनको अब एकत्र किया जा रहा है, ताकि बड़ी कार्रवाई के लिए सटीक तथ्यों की जरूरत को पूरा किया जा सके।
सूत्रों ने बताया कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है, सीएम से लेकर मंत्री और अधिकारियों में यहां के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में किए गए भ्रष्टाचार की चर्चा है। भाजपा के आंदोलन के चलते ही पूर्व चीफ इंजीनियर यादव के सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू हो सकी थी।
आयकर विभाग और ईडी को भेज रहे जानकारी
बिल्डर से लेकर दलाल भी यशपाल की प्रॉपर्टी के बारे में गोपनीय जानकारी आयकर विभाग और ईडी को भेज रहे हैं। प्राधिकरण के अधिकारी भी पूरी जानकारी प्रदेश सरकार को दे चुके हैं। खुद को सुरक्षित करने के लिए होड़ लगी है कि सबसे ज्यादा जानकारी कौन दे सके।