दुष्कर्म के एक मामले में पीड़िता ने ही आरोपी के पक्ष में बयान देकर उसकी रिहायी का रास्ता आसान कर दिया। पीड़िता का कहना है कि उसके व आरोपी के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे और अब दोनों पति-पत्नी हैं। लिहाजा वह अब उसके खिलाफ कोर्ई कार्रवाई नहीं करना चाहती। अदालत ने पीड़िता के बयान के मद्देनजर आरोपी को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है।
तीस हजारी की फास्ट ट्रैक अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैल जैन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केस की मुख्य चश्मदीद गवाह पीड़िता इस केस में आरोपी के खिलाफ नहीं है। पुलिस और डॉक्टर इस केस के साधारण गवाह है, लिहाजा अदालत ऐसी स्थिति में आरोपी को 10 हजार के मुचलके पर दुष्कर्म के आरोप से बरी करती है।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि 2015 में पीड़िता दिल्ली आई और गणेश नगर दिल्ली में बतौर घरेलू सहायिका काम करने लगी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले सोनू के संपर्क में आई थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती हो गई। इसके बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। उसके बाद पीड़िता ने सितम्बर 2016 में पुलिस को शिकायत दी कि सोनू ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बाबत पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिफ्तार कर लिया।