मां का नहीं उठाया था कॉल
गरिमा के घर जाने से पहले करीब 8.30 बजे शिवेंद्र पांडेय ने उसे कॉल किया था। लेकिन कई बार फोन करने के बाद भी गरिमा ने फोन नहीं उठा। मां ने भी गरिमा को कॉल किया तो उसने फोन नहीं उठा। शक होन पर गरिमा की मां ने शिवेंद्र को कॉल कर गरिमा को जाकर देखने के लिए कहा था।
गरिमा के साथ रहने वाले डॉ राकेश यादव ने बताया कि रात करीब 9.00-9.15 बजे उसने चंद्र प्रकाश को बैग लेकर हड़बड़ाहट में जाते देखा था। इसके बाद से लगातार उसका मोबाइल बंद आ रहा है। शुरूआती जांच के बाद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चंद्र प्रकाश ने ही किसी वजह से गरिमा की हत्या की है।
बंगलूरू में रहने वाले सगे भाई से की आखिरी बार फोन पर बात
रंजीत नगर इलाके में डॉक्टर गरिमा की हत्या रात 8.00 बजे से 8.30 बजे के बीच की गई। छानबीन में पुलिस को पता चला है कि गरिमा ने रात करीब आठ बजे बुआ के लड़के शिवेंद्र पांडेय को कॉल किया था, लेकिन वह फोन नहीं उठा पाया। इसके बाद गरिमा ने बंगलूरू में रहने वाले सगे भाई ज्योर्तिमय मिश्रा से बातचीत की। गरिमा ने उन्हें बताया कि कोचिंग की छुट्टी होने के कारण वह रात 10 बजे की बस पकड़कर गोरखपुर निकलने वाली है। उधर, शिवेंद्र ने रात 8.30 बजे गरिमा को कॉल किया तो उसका फोन नहीं उठा। परिजन लगातार 11 बजे तक उसके मोबाइल पर कॉल करते रहे, लेकिन उससे किसी की बात नहीं हो सकी। देर रात को शिवेंद्र जब उसके फ्लैट पर पहुंचा तो उसकी हत्या का पता चला।
मामले की छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि गरिमा की बुआ का लड़का शिवेंद्र पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उन्होंने पुलिस बताया है कि गरिमा ने मंगलवार दिन में तीन बजे उसे कॉल किया। कोचिंग की 11 मई तक छुट्टी होने की जानकारी दी। गरिमा ने शिवेंद्र से कहा कि वह उसका बस का टिकट करवा दे। शिवेंद्र ने मंगलवार रात 10 बजे का ऑनलाइन टिकट भी बुक कराकर उसके मोबाइल पर भेज दिया था। गरिमा को रात दस बजे मयूर विहार एक्सटेंशन से बस में सवार होना था। दिन में कई बार गरिमा की शिवेंद्र से इस संबंध में बातचीत हुई थी। रात में गरिमा के फोन नहीं उठाने पर शिवेंद्र ने गोरखपुर जाने वाली बस के चालक को कॉल करभी पूछा कि सीट नंबर-6 की सवारी गरिमा बस में सवार हुई की नहीं। बस चालक ने बताया कि गरिमा बस में नहीं पहुंची है।
हत्या की सूचना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों सहित क्राइम टीम ने घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। शुरूआती जांच के बाद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या से पूर्व गरिमा की हत्यारे से खूब नोकझोंक हुई थी। गरिमा ने हत्यारे से बचने का पूरा प्रयास किया। कमरे से इसके सबूत मिले हैं। यदि डॉ. चंद्र प्रकाश ने ही गरिमा की हत्या की तो उसके पीछे क्या वजह थी, पुलिस इसका पता लगाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि चंद्र प्रकाश के पकड़े जाने के बाद ही हत्या की असली वजहों का पता चल पाएगा।
वारदात के समय डॉ. राकेश गया था हनुमान मंदिर
चंद्र प्रकाश के साथ कमरे में रहने वाले डॉक्टर राकेश यादव ने पुलिस को बताया है कि मंगलवार होने के कारण वह घर के पास ही स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए गया था। रात करीब 9.00 बजे वह घर पहुंचा तो चंद्र प्रकाश उसे जीने पर मिला। उसके हाथ में एक बैग था। राकेश ने चंद्र प्रकाश से पूछा कि वह कहां जा रहा है तो वह बिना कुछ कहे हड़बड़ाहट में चला गया। इसी दौरान राकेश के मोबाइल पर एक कॉल आ गया। वह फोन सुनता हुआ ऊपर चढ़ गया। फोन सुनने के बाद वह काम में व्यस्त हो गया। उसे गरिमा और चंद्र प्रकाश का ख्याल ही नही रहा। रात करीब 11 बजे शिवेंद्र फ्लैट पर पहुंचा तो उसे गरिमा की हत्या और चंद्र प्रकाश के फरार होने का पता चला। अपने बयान में राकेश ने पुलिस को चंद्र प्रकाश पर ही हत्या का शक जताया है।
सदमे में है गरिमा का परिवार
बचपन से गरिमा का सपना था कि वह डॉक्टर बने। उसने सपने को पूरा भी कर दिखाया और नौकरी के लिए दिल्ली आ गई। डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए उसने अस्पताल से नौकरी छोड़ दी। गरिमा एमडी में दाखिले के लिए जनवरी माह से कोचिंग कर रही थी। उसे पूरी उम्मीद थी कि इस साल वह एमडी में दाखिला ले लेगी। उधर, मौत की खबर से गरिमा का परिवार गहरे सदमे में है। माता-पिता का रोते-रोते बुरा हाल है। परिवार गोरखपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है।