नई दिल्ली की एक अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप से ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) के पूर्व अधिकारी को बरी कर दिया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शादी जीवनभर की जिम्मेदारी होती है और इसके लिए दोनों पक्षों को जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बैठाना जरूरी होता है। आरोपी महिला से शादी करना चाहता था, लेकिन उसके गैर जिम्मेदार रवैये को देखने के बाद आरोपी के पास शादी से इनकार करने की अपनी वजह थी।
पुलिस के मुताबिक पेशे से पत्रकार महिला और ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व कर्मचारी की मुलाकात फरवरी 2009 में हुई थी। फिर दोनों में प्यार हो गया।
महिला ने बताया था कि वे दोनों एक दूसरे के घर रुकते थे और शारीरिक संबंध बन गए। आरोपी शादी का वादा कर उससे शारीरिक संबंध बनाता रहा, लेकिन हमेशा पारिवारिक परेशानियों का हवाला देकर शादी को टालता रहा।
अपने फैसले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि आरोपी ने कभी भी पीड़िता को धोखा नहीं दिया। उसकी मंशा शादी करने की थी। आरोपी शख्स अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार था, हालांकि महिला ने इसे शादी न करने का बेतुका कारण बताया।
अदालत ने कहा कि अगर आरोपी की बात पर भरोसा किया जाए तो उसने महिला के व्यवहार को देखने के बाद उससे शादी करने का इरादा बदला था।
महिला ने आरोपी के कैंसर पीड़ित पिता से दुर्व्यवहार किया था, उसके कार्यालय में हंगामा किया और उसकी कार का शीशा भी तोड़ दिया था। इतना ही नहीं वह आत्महत्या करने और उसे गिरफ्तार करवाने की धमकी देने लगी थी। अदालत ने कहा कि यह दो व्यस्कों के बीच प्रेम प्रसंग का मामला है। इसका अंत सुखद नहीं रहा, महज इसलिए इसे दुष्कर्म का मामला नहीं बनाया जा सकता।