दिल्ली के दो प्रतिष्ठित अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अब द्वारका कोर्ट में एक फर्जी वकील पकड़ा गया। कानून की कोई डिग्री नहीं होने के बावजूद फर्जी वकील अदालत में 50 से 60 मामलों की पैरवी कर रहा था। जांच में पता चला कि आरोपी वर्ष 2010 से कोर्ट में फर्जीवाड़ा कर रहा है।
एक युवक की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक फर्जी वकील की पहचान अजीतकार के रूप में हुई है।
वह मूलत: उड़ीसा का रहने वाला है और फिलहाल द्वारका सेक्टर 19 में रहता था। शनिवार को अदालत में एक मामले की सुनवाई के दौरान फर्राटेदार अंग्रेजी में बहस करते देख एक महिला वकील ने उससे विजिटिंग कार्ड मांगा। लेकिन अजीतकार ने बताया कि उसके पास किसी भी तरह का कोई कार्ड नहीं है।
महिला वकील ने इस बात की जानकारी बार काउंसिल को दी। बार काउंसिल के सदस्यों ने आरोपी से पूछताछ कर दस्तावेज व पंजीकरण संख्या के बारे में जानने की कोशिश की। लेकिन उसने किसी तरह के दस्तावेज होने से इंकार कर दिया। उसके बाद सभी वकील उसे फर्जी वकील कहने लगे।
शोर सुनकर मोहन गार्डन निवासी अंकुर भी मौके पर पहुंचा। अजीतकार को फर्जी वकील बताए जाने पर अंकुर ने वकीलों को बताया कि अजीतकार उसकी बहन का केस लड़ रहा है। इसके लिए उसने पचास हजार रुपये बतौर फीस लिए हैं और बांकी का पचास हजार बहस के बाद देने के लिए कहा है।
वकीलों ने अजीतकार को पुलिस के हवाले कर दिया। अंकुर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अजीत ने बताया कि वह कानून की पढ़ाई कर चुका है लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह पेशे से अध्यापक है और कोचिंग में पढ़ाता है। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किसकी मदद से अदालत में वकालत कर रहा था।