दक्षिण पश्चिम जिला स्पेशल स्टाफ ने एक ऐसे डॉक्टर को गिरफ्तार किया है जो महंगी बाइक की चोरी कर उसे ओएलएक्स और क्विकर पर बेच देता था। आरोपी ने विदेश से एमबीबीएस की डिग्री ली है और नौकरी नहीं मिलने पर आपराधिक वारदात को अंजाम देने लगा।
विज्ञापन
पुलिस ने इसके कब्जे से 18 बाइक व स्कूटी बरामद की है। आरोपी के पास से दर्जन भर फर्जी पहचान पत्र, फर्जी नाम और पते पर लिए गए सिम, आरसी और नंबर प्लेट बरामद किए गए।
आरोपी यह काम दो साल से कर रहा था और अब तक 50 बाइकें व स्कूटी बेच चुका है। उसने चोरी की बाइक को रखने के लिए एक गोदाम भी किराए पर ले रखा था। आरोपी की पहचान सफराज अहमद (29) के रूप में हुई है। इसके अलावा उसने अपना नाम डॉक्टर आनंद श्रीवास्तव उर्फ अमित घोष उर्फ अंकित शर्मा भी रखा था।
विज्ञापन
उसके पास से दो फर्जी आरसी भी मिली
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र कुमार के मुताबिक जिले में वाहन चोरी की बढ़ती घटना को देखते हुए जिले के स्पेशल स्टाफ को जांच की जिम्मेदारी दी गई। एसीपी राजेंद्र सिंह और इंस्पेक्टर रमेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की।
पुलिस ने कई फोन नंबर की सीडीआर की जांच की और कई लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कई पढ़े लिखे युवक भी जल्द रुपये कमाने के लिए आपराधिक वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
18 फरवरी की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक उत्तम नगर इलाके में चोरी की बाइक लेकर आ रहा है। पुलिस की टीम ने घेराबंदी कर युवक को दबोच लिया। हालांकि युवक ने खुद को पेशे से डॉक्टर बताया लेकिन शक होने पर जब पुलिस ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास से दो ड्राइविंग लाइसेंस मिले। इसमें दो अलग-अलग नाम थे लेकिन दोनों पर फोटो आरोपी का लगा हुआ था। उसके पास से दो फर्जी आरसी भी मिली।
लैपटॉप, प्रिंटर, स्केनर और दस सिम कार्ड बरामद
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
जांच के दौरान पता चला कि बाइक प्रसाद नगर इलाके से चुराई गई है। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर मटियाला स्थित गोदाम से 18 बाइक व स्कूटी, दर्जन भर फर्जी नंबर प्लेट, दर्जन भर फर्जी आरसी, डीएल और पहचान पत्र, लैपटॉप, प्रिंटर, स्केनर और दस सिम कार्ड बरामद किए गए।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह वाहनों की चोरी करने के बाद उसे मटियाला में किराये पर लिए गोदाम में रखता था। सभी वाहनों के फर्जी कागजात तैयार करने के बाद उसे क्विकर, ओएलएक्स और क्लीक इंडिया पर बेच देता था।
वह दो साल से वारदात को अंजाम दे रहा है और अब तक करीब 50 बाइकें व स्कूटी बेच चुका है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी से 25 मामले को सुलझाने का दावा किया है।
जांच में पता चला कि आरोपी महंगे वाहनों की चोरी करने के लिए पहले रेकी करता था। फिर ऐेसे समय में चोरी की वारदात को अंजाम देता था जब लोग घरों में होते थे। वह घरों के बाहर खड़ी बाइक और स्कूटी को निशाना बनाता था। वह बाइक व स्कूटी की लॉक को नकली चाबी या फिर लॉक तोड़कर चोरी करता था। ऐसे वाहनों में सबसे पहले फर्जी नंबर प्लेट लगाता था। लैपटॉप व प्रिंटर की मदद से उसकी फर्जी आरसी, डीएल और पहचान पत्र तैयार करता था। उसके बाद वह फर्जी पहचान पत्र से लिए गए सिम से ओएलएक्स, क्विकर और क्लीक इंडिया पर ऑनलाइन आईडी बनाता था। वह एक सिम का इस्तेमाल एक बार ही करता था।