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75 से भी ज्यादा आतंकी मामलों में वांछित खालिस्तानी आतंकी गुरसेवक गिरफ्तार

Wed, 22 Mar 2017 10:29 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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खल‌िस्तानी आतंकी गुरसेवक स‌िंह - फोटो : ani
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के भगोड़े आतंकी को गिरफ्तार किया है। आतंकी की पहचान किढ़ानी कलां, पहल, लुधियाना, पंजाब निवासी गुर सेवक सिंह उर्फ बाबला (51) के रूप में हुई है। पुलिस की मानें तो पंजाब में जब आतंक अपने चरम पर था, उस समय गुर सेवक सक्रिय आतंकी था। 50 से अधिक आतंकी वारदात, लूटपाट, थानों में डकैती, पुलिस कर्मियों की हत्या, पुलिस इनफॉरमर की हत्या व अन्य अपराधों में शामिल गुर सेवक दोबारा से अपना संगठन खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। 
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फिलहाल वह पाकिस्तान में बैठे मौजूदा केसीएफ चीफ परमजीत सिंह पंजवाड़ व जेल में बंद केसीएफ चीफ जगतार सिंह उर्फ हावड़ा के संपर्क में था। पुलिस ने इसके पास से एक पिस्टल व चार कारतूस बरामद किए हैं। अपराध शाखा पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त प्रवीर रंजन ने बताया कि उनकी टीम को सूचना मिली थी कि केसीएफ का भगोड़ा आतंकी गुर सेवक सिंह उर्फ बाबला हथियार के साथ एनएच-8, महिपालपुर के पास अपने किसी साथी से मिलने आने वाला है। सूचना के बाद डीसीपी भीषम सिंह, एसीपी जसबीर सिंह और इंस्पेक्टर पीसी खंडूरी की टीम ने आरोपी को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक पिस्टल व चार कारतूस बरामद हुए। 
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पूछताछ में बाबला ने बताया कि उसने करीब 26 साल पुलिस हिरासत में बिताए। वहीं दो बार दिल्ली व राजस्थान से पुलिस हिरासत से भी भाग चुका है। 2010 में जेल से रिहा होने के बाद वह दोबारा कभी किसी भी मामले में कोर्ट में पेश नहीं हुआ। पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी को भगोड़ा घोषित किया हुआ था। पुलिस इससे पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।

गुर सेवक जरनैल सिंह भिंडरावाला का था साथी
गुरसेवक 1984 में सेना द्वारा पंजाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के दौरान मारे गए खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाला का साथी रहा है। सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन के बाद ज्यादातर आतंकी पाकिस्तान भाग गए थे। वहां आईएसआई के संरक्षण में अब भी आतंकी अपना नेटवर्क चला रहे हैं। गुरसेवक पाकिस्तान में बैठे मौजूदा केसीएफ चीफ परमजीत सिंह पंजवाड़ के संपर्क में था। इसके अलावा जेल में बंद बाकी साथियों के भी संपर्क में था।

कौन है गिरफ्तार आतंकी गुरसेवक
गुर सेवक का जन्म पंजाब के लुधियाना में हुआ था। 1980 के दशक में इसका बड़ा भाई स्वर्ण सिंह जरनैल सिंह भिंडरावाला के संगठन में शामिल हो गया। उसी से प्रभावित होकर 1982 में गुरसेवक भी खालिस्तानी आतंकी संगठन में शामिल हो गया। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद आतंकियों ने बब्बर खालसा व बिंदरवाला टाइगर फोर्स नामक आतंकी संगठन बनाए। बाद में गुर सेवक मानवीर द्वारा बनाए गए आतंकी संगठन केसीएफ में शामिल हो गया। मई 1984 में गुरसेवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर जालंधर में एक दैनिक अखबार के संपादक की हत्या कर दी। पुलिस ने उसे दबोच लिया।
1985 में आरोपी राजस्थान के भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन पर पुलिस की कस्टडी से फरार हो गया। इसके बाद इन लोगों ने पंजाब के डीजीपी के घर पर हमला किया। पूर्व केसीएफ चीफ जरनैल लब सिंह व अन्यों को जालंधर के कोर्ट से छुड़ाने के दौरान आरोपियों ने फायरिंग कर दी थी जिसमें आठ पुलिस कर्मियों समेत अन्य लोग मारे गए थे।

गुर सेवक पर दर्जनों आपराधिक मामले
गुर सेवक पर पुलिस कर्मियों की हत्या, पुलिस मुखबिरों की हत्या, लूटपाट और पुलिस थानों में लूटपाट के दर्जनों मामले दर्ज हैं। 1986 में इसने पंजाब के एक थाने में हमला कर 16 रायफल, छह कारबाइन, दो रिवाल्वर, पुलिस जीप, फिएट कार व भारी मात्रा में कारतूस लूट लिए थे। इसी दौरान उसने नौ लोगों की हत्या की, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसने 18 साल जेल में बिताए। 2004 तक वह तिहाड़ में हाईरिस्क जेल में रहा। 2004 में वह पंजाब पुलिस की कस्टडी से दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट से फरार हो गया था। एक हफ्ते बाद उसे दोबारा दबोच लिया गया। 2010 में जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने अपना मकान बदल दिया। इसके बाद वह लगातार लूटपाट की वारदात में शामिल रहा। 2014,15,16 में लुधियाना पुलिस ने उसे लूटपाट के आरोप में गिरफ्तार भी किया, लेकिन वह जमानत पर छूट गया।

आईएसआई के संपर्क में था आरोपी
गुर सेवक ने खुलासा किया कि वह जेल में होने के बाद पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में था। आरोपियों से संपर्क कर उसने भारी मात्रा में पाकिस्तान से विस्फोटक मंगाया था, जिसे दिल्ली पुलिस ने 1998 में पकड़कर दो आतंकियों को दबोचा था। इनके पास से 18 किलोग्राम आरडीएक्स, एके-47, पिस्टल, भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए थे। गुरसेवक ने बताया कि ड्रग्स व नकली नोटों के लिए आईएसआई उनके संगठन को मोटी रकम मुहैया करवाती थी।
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