दक्षिण भारतीय राज्यों के मोस्ट वांटेड बदमाश छोटा डॉन उर्फ इंतजार को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दबोच लिया है। मूलरूप से ककराला, अलहपुर, बदायूं निवासी इंतजार ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में सेंधमारी से आतंक मचा रखा था।
इंतजार गैंग के साथ मिलकर बैंकों को निशाना बनाता था। गैस कटर व अन्य उपकरणों की मदद से रात को बैंक का स्ट्रांग रूम काटकर कैश और सोना उड़ा लिया जाता था।
पश्चिमी यूपी में छोटा डॉन के नाम से जाने वाला इंतजार खुद को दाउद इब्राहिम का रिश्ते का भाई बताता था और जेब में हमेशा उसकी फोटो रखता था।
तीन महीने पहले की थी बड़ी लूट
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि 31 जनवरी को बदमाशों ने मसनकट्टी, हावेरी, कर्नाटक में सिंडीकेट बैंक की एक ब्रांच को निशाना बनाया। बदमाशों ने पहले खिड़की काटी बाद में गैस कटर की मदद से स्ट्रांग रूम को काटकर 1.06 करोड़ रुपये और सोना उड़ा लिया।
कर्नाटक पुलिस को जांच में पता चला कि वारदात में इंतजार के गैंग का हाथ है। कर्नाटक पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन मुठभेड़ में सभी आरोपी फरार हो गए। इसके बाद कर्नाटक पुलिस ने इंतजार की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस से मदद की गुहार लगाई।
शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह की टीम को सूचना मिली कि गैंग दिल्ली में वारदात के लिए आने वाला है। पुलिस ने कश्मीरी गेट आईएसबीटी इलाके से इंतजार को दबोच लिया।
ऐसे करते थे शातिर चोरी
पूछताछ में उसने बताया कि वह जयपुर में एक बैंक की रेकी करके राजधानी पहुंचा है। जल्द ही उस बैंक को निशाना बनाया जाना था। गैंग के बाकी सदस्य गांव में हैं। पुलिस की कई टीमें तलाश में बदायूं रवाना की गई हैं।
इंतजार ने पुलिस को बताया कि वह दक्षिण भारतीय राज्यों में फ्रूट और सब्जी ट्रांसपोर्टर के नाम पर जाते थे। साथ में गैस कटर और चोरी करने में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य औजार ले जाते थे। ऐसी जगह की रेकी करते थे जो फ्रूट और सब्जी मार्केट के नजदीक होती थी।
रात के समय वारदात की जाती थी। इसके बाद माल समेटकर बदायूं लौट आते थे। गैंग ने कर्नाटक में ही त्रच्ची, कुमता और त्रिउवाली जगहों पर बैंकों को निशाना बनाया था।
ऐसे बनाया गिरोह
इंतजार (32) किसान परिवार से ताल्लुक रखता है। शुरुआत में उसने ट्रक खरीदकर दक्षिण भारत में सब्जी और फ्रूट की सप्लाई करना शुरू किया। वह चाहता था दाऊद की तरह अंडरवर्ल्ड में उसका नाम हो।
इसी वजह से उसने खुद का गैंग बनाया। गैंग में इलाके के बेरोजगार युवकों और लोकल बदमाशों को शामिल किया। वर्ष 2003 में उसने मुरादाबाद के चंदौसी में गार्ड की हत्या करने के बाद बैंक लूट लिया। बाद में वह जेल चला गया।
जेल से आने के बाद वह पुलिस के लिए नासूर बन गया। मार्च 2013 में चंद्रपुर महाराष्ट्र में उसने कॉटन व्यवसायी के यहां लूटपाट की।