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स्पेशल स्टाफ ने 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश को दबोचा 

Sun, 26 Mar 2017 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

- बदमाश केखिलाफ 52 से ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज हैं 

- बदमाश के खिलाफ 52 से ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज हैं
- आरोपी पुलिस टीम पर भी फायरिंग करने में गुरेज नहीं करता था 
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- फोटो : demo
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विस्तार
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दक्षिण-पूर्व जिले के स्पेशल स्टाफ ने शातिर बदमाश आसिफ उर्फ काला को जामिया नगर इलाके से गिरफ्तार किया है। इसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा हुआ था। आरोपी इतना शातिर है कि पुलिस टीम पर फायरिंग करने में गुरेज नहीं करता था।
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आरोपी के खिलाफ 52 से ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज है। फिलहाल ये रॉबरी के दस, स्नैचिंग के पांच और पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर के दो मामलों में वांछित था। दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी रोमिल बानिया के अनुसार स्पेशल स्टाफ में तैनात एसआई योगेश को 24 मार्च को सूचना मिली थी कि शातिर बदमाश आसिफ अपने साथी से मिलने रात करीब साढ़े नौ बजे बटला हाउस, जामिया नगर आएगा।

इस सूचना के बाद एसीपी केपी सिंह की देखरेख में इंसपेक्टर राजेन्द्र कुमार, एसआई योगेश कुमार(डी-4306), योगेश कुमार (डी-4457) व एसआई परवेज कसाना की टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने एक पिकेट तिकोना पार्क, ओखला हैड रोड ओखला गांव में और दूसरी एस्कोर्ट अस्पताल की तरफ जाते हुए बटला हाउस में लगाई।
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रात करीब एक बजे बटला हाउस की तरफ से स्वीफ्ट डिजायर कार से आता हुए एक व्यक्ति दिखाई। पुलिस टीम ने बेरीकेड्स से रास्ते को बंद कर दिया। आरोपी ने खिड़की का शीशा खोलकर पिस्टल निकाल ली और पुलिसकर्मियों को दिखाते हुए भागने लगा। एसआई योगेश व एएसआई श्यामवीर की टीम ने आरोपी से पिस्टल छीन कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसकेपास से पिस्टल व चार कारतूस बरामद किए गए।

आरोपी ने बताया कि जब वह 14 वर्ष का था उस समय उसके पिता की मौत हो गई। गरीबी के चलते ये छोटे-मोटे अपराध करने लगा। इसने अपनी साथी दानिश व मुक्करर्म की बहन से शादी की थी और उसके तीन बच्चे हैं।

भजनपुरा पुलिस ने इसे वर्ष 2001 में गिरफ्तार किया था, जब झपटमारी के पांच मामले सुलझे थे। जेल से बाहर आने के बाद इस ने जामिया नगर निवासी जावेद, फहीम व इमरान के गिरोह में शामिल हो गया था। वर्ष 2002 में ये फिर गिरफ्तार हुआ था और लूटपाट व झपटमारी के छह मामले सुलझे थे।

जेल से बाहर आने के बाद ये सत्यप्रकाश उर्फसत्ते गिरोह में शामिल हो गया। इसने सत्यप्रकाश के साथ वर्ष 2002 में सनसनीखेज रॉबरी की थी। स्पेशल सेल ने सत्यप्रकाश को गिरफ्तार कर लिया, मगर आसिफ फरार हो गया था।

आरोपी ने वर्ष 2208 में जावेदस केर साथ मिलकर मंडावली थाने की पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। विवाद होने के कारण ये सत्ते से अलग हो गया। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने इसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। वर्ष 2015 में ये फिर सत्ते गिरोह में शाजमिल हो गया। 

हाल ही में पुलिस टीम पर दो बार की थी फायरिंग
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आसिफ अपने साथी दानिश, मुक्करर्म, मनीष, सुनील, गोवर्धन विश्वकर्मा व कृष्ण कुमार केसाथ पुलप्रह्लादपुर इलाके में एक दिसंबर, 2016 को डकैती डालने जा रहे थे। जब ये कारों से जा रहे थे पुलप्रह्लादपुर पुलिस ने इन्हें घेर लिया था।

पुलिस ने मनीष, सुनील, गोवर्धन विश्वकर्मा और कृष्ण कुमार को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि आसिफ व मुक्करर्म पुलिस टीम पर फायरिंग कर फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने दोनों पर 25-25 हजार का इनाम घोषित कर दिया था।

स्पेशल स्टाफ एसीपी केपी सिंह की टीम ने आसिफ के बारे में मिली सूचना के बाद नेहरू प्लेस में चार फरवरी, 2017 को घेराबंदी की थी। यहां पर भी आरोपी पुलिस टीम पर फायरिंग कर फरार हो गया था। पुलिस ने इसके साथी दानिश को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी नंदनगरी इलाके का एबसेंट घोषित बदमाश है।
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