भाभी को बंधक बनाने व छेड़छाड़ के मामले में अवकाशकालीन अदालत ने अग्रिम जमानत प्रदान की है। इससे पहले महिला के देवर को अन्य अदालत ने गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी।
मामला रोहिणी नॉर्थ थाना इलाके का है। रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार गोयल ने मंगलवार को आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक जमानती की शर्त पर जमानत दी है।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी होने के हालात में एसएचओ अथवा जांच अधिकारी आरोपी को निजी मुचलके व एक जमानती की शर्त पर जमानत प्रदान करेगा। अदालत ने आरोपी को जांच में पुलिस का सहयोग करने का निर्देश दिया है।
घर में की थी छेड़छाड़
इस मामले में इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाऊ ने आरोपी के भाई व सह-आरोपी को राहत प्रदान की थी। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया था कि आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले सात दिनों का नोटिस दिया जाए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित साहनी ने कहा कि इस मामले में उनके मुव्वकिल की भूमिका उसके भाई से बेहद हल्की है जबकि कोर्ट ने उसे गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की है।
पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता को केस वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी दी है। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने अपनी सगी भाभी के साथ पिछले साल 27 मई को अपने घर पर छेड़छाड़ की थी।
गवाहों को नहीं धमकाया: दिल्ली पुलिस
उधर, लाजपतनगर थाने में महिला वकील से बदसलूकी के मामले में दिल्ली पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षा मुहैया करा दी है। साथ ही कहा है कि गवाहों को पुलिस ने धमकाया नहीं है। वकील ने इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा कि चार अप्रैल को थाने में हुई कथित वारदात की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने वारदात के गवाहों से संपर्क नहीं किया है।
महिला वकील ने आरोप लगाया था कि पुलिस गवाहों को धमका रही है। पुलिस आयुक्त ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। पुलिस गवाहों के बयान दर्ज करने उनके घर जाएगी। वकील अंबिका दास को 29 मई को पुलिस सुरक्षा मुहैया करा दी गई। यह सुरक्षा अभी भी जारी है।
थाने में किया था दुर्व्यवहार!
गौरतलब है कि चार अप्रैल को पुलिस थाने में महिला वकील के साथ पुलिस की ज्यादती पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया था।
वकील की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई थी। पुलिस आयुक्त से कहा गया है कि वह खुद अपनी निगरानी में इस मामले की जांच करें।
वकील का कहना है कि अदालत के आदेश के तहत वह चार अप्रैल को लाजपत नगर थाने गई थी कि पुलिस वालों ने उससे दुर्व्यवहार किया। मामले की सुनवाई 14 जुलाई के लिए निर्धारित है।