दिल्ली की एक अदालत ने अमेरिका की एक महिला के साथ डिजिटल रेप के मामले में आरोपी को दोषी ठहराया गया है, हालांकि एफएसएल की रिपोर्ट नेगेटिव मिलने के कारण आरोपी पर लगी दुष्कर्म की धाराओं को खारिज कर दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ईला रावत ने कहा कि जब कोई अपने हाथों से किसी महिला के गुप्तांग से छेड़छाड़ करता है तो वह डिजिटल रेप का दोषी होता है। महिला का अब भारत में कोई रहने कोई मकसद बाकि नहीं बचा है, क्योंकि इस घटना के बाद महिला की शादी भी टूट गई। मामले में हुई एफएसएल जांच रिपोर्ट में आईपीसी की धारा 376 के तहत दुष्कर्म की पुष्टि न होने पर अदालत ने आरोपी को 2013 में संशोधित डिजिटल रेप के तहत दोषी ठहराया।
महिला ने याचिका में अदालत को बताया कि अमेरिका और रूस के दो विदेशियों के साथ उनके मानि मालिक के बेटे द्वारा 24 जून 2013 की तड़के करीब 4 बजे यौन शोषण किया गया। इस बाबत पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
अदालत में आरोपी ने दलील दी कि महिला के पति और उसके बीच विवाद था इस वजह से उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वहीं पीड़िता ने अदालत में गवाही दी कि घटना के वक्त वह अपने पति के साथ सो रही थी और तभी उनके मकान मालिक का बेटा उनके कमरे में घुस आया और उसके गुप्तांग में हाथ से छेड़छाड़ की।