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नीलकंठ-उल्लू की नहीं हो सकेगी तस्करी, वन विभाग ने अलर्ट किया खुफिया तंत्र

Tue, 11 Oct 2016 09:45 AM IST
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा
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- फोटो : अमर उजाला
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ऐसी मान्यता है कि यदि दीपावली पर उल्लू व नीलकंठ जैसे पक्षियों के दर्शन हो जाएं तो पूजा सार्थक होती है। धन की वर्षा होती है। इसका फायदा तस्कर उठाते हैं। वह लोगों को पक्षियों के दर्शन कराने के नाम पर मोटी रकम ऐंठने के चक्कर में रहते हैं, लेकिन इस बार इन्हें रोकने के लिए वन विभाग तैयार है। विभागीय टीम का एक तंत्र इन तस्करों को पकड़ने की जुगत में लगा है। मुखबिर से लेकर सभी तंत्रों को अलर्ट किया जा चुका है।
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वन विभाग का कहना है कि यदि कोई भी तस्करी की सूचना मिलेगी तो तुरंत कार्रवाई होगी। शहर में दिल्ली व आसपास की नम भूमि से पक्षियों को पकड़कर पिंजड़ों में कैद कर दिया जाता है। दीपावली के दौरान इनकी तस्करी की जाती है। हर साल दो से तीन तस्कर पकड़े जाते हैं।

फिलहाल, अभी तक ऐसे किसी भी तस्कर की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन दीपावली से आठ-दस दिन पहले तस्करों के शहर में आने का अंदेशा रहता है। पक्षियों की अधिकांश तस्करी दिल्ली के पुराने इलाकों चांदनी चौक व आसपास के क्षेत्रों से ज्यादा होती है।
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5 से 10 हजार रुपये तक की मांग
तस्कर एक पक्षी की कीमत 5 से 10 हजार या इससे भी ज्यादा मांगते हैं। यही नहीं ऑन डिमांड भी पक्षियों को लोगों के घर तक पहुंचाया जाता है। इसका माध्यम शहर के पक्षी विक्रेता बनते हैं जो ऊंचे दामों पर पक्षियों की तस्करी में लिप्त हैं।

तांत्रिक के मामले आते हैं ज्यादा
दिवाली या दशहरा के समय सबसे ज्यादा उल्लू की तस्करी होती है। दरअसल, तांत्रिक या इस जैसी गतिविधियों में लिप्त लोग उल्लू की खाल, हड्डी, खून व अन्य अंग का प्रयोग भी पूजा के लिए करते हैं। ऐसे में इन लोगों पर भी नजर रखी जा रही है।- एचवी गिरीश, डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर
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