एसटीएफ द्वारा सात-नवंबर-2015 में गिरफ्तार किया गया कुख्यात बावरिया राज किशोर बहेलिया उर्फ काला प्रधान एक साल से फरार है। एसटीएफ ने उसे बेटे धर्मेन्द्र के साथ थाना सूरजपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। बाप-बेटे एक साल पहले अलीगढ़ के फर्जी जमानतियों के जरिए जिला जेल से बाहर आए थे और तब से लापता हैं। जेवर गैंग रेप कांड में इस गिरोह के शामिल होने की आशंका के मद्देनजर इनकी तलाश तेज कर दी गई है।
एसटीएफ ने जिस वक्त जयसिंहपुर उर्फ बनपोई थाना मोहम्मदाबाद जिला फर्रूखाबाद निवासी काला प्रधान को गिरफ्तार किया था, उस पर 10 हजार रुपये का ईनाम था। तब वह यूपी के कई जिलों से लूट व हत्या की दर्जनों वारदात में वांछित था। काला प्रधान ने 17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। धीरे-धीरे उसने अपना गिरोह बना लिया। ये गिरोह लूट से पहले हत्या के लिए कुख्यात है। ये गिरोह एनसीआर, यूपी, बिहार व मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में वारदात कर चुका है। 15 साल तक कई जिलों व राज्यों की पुलिस से बचने के बाद काला प्रधान बेटे सहित एसटीएफ के हत्थे चढ़ा था।
दिल्ली में रह रहा था बेटा
गिरफ्तारी के वक्त काला प्रधान और उसका बेटा धर्मेन्द्र दीपक विहार नजफगढ़ दिल्ली में रह रहे थे। जेवर गैंग रेप कांड केबाद पुलिस ने इनके दिल्ली के पते पर जांच की तो मालूम चला कि आरोपी अब यहां नहीं रहते हैं। मूल निवास ये पहले ही छोड़ चुके हैं। आशंका है कि ये लोग अब भी एनसीआर में कहीं रहकर वारदातों कर रहे हैं।
सम संख्या में बिना मोबाइल फोन के वारदात करता है गिरोह
काला प्रधान गिरोह अंधविश्वास की वजह से हमेशा सम संख्या में वारदात करता है। इसके अलावा ये गिरोह वारदात में मोबाइल का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करते हैं। योजना और रैकी भी ये मिलकर करते हैं। मां और नाबालिग बेटी संग हुए बुलंदशहर गैंग रेप में भी 12 आरोपी थे। जेवर गैंग रेप में भी छह आरोपी थी। पिछले एक साल में बुलंदशर व जेवर आसपास हुई ज्यादातर वारदातों में बदमाश सम संख्या में ही थे। इसलिए भी इस गिरोह के शामिल होने की आशंका बढ़ गई है। ये भी आशंका है कि बाप-बेटे या इनके गिरोह के कुछ सदस्यों ने स्थानीय बदमाशों के साथ वारदात की है।
एक साल से फरारी के बाद भी वांछित नहीं है
गिरफ्तारी के छह माह बाद बाप-बेटा अलीगढ़ के फर्जी जमानतदारों की मदद से जेल से बाहर आ गए। आरोपियों की जमानत की जानकारी मिलने पर एसटीएफ एसएसपी की तरफ से अलीगढ़ एसएसपी को कई बार पत्र लिख, इनके जमानतियों का सत्यापन करने और कोर्ट में रिपोर्ट लगाने के लिए पत्र लिखा। बावजूद अलीगढ़ पुलिस ने सत्यापन नहीं किया। कोर्ट से इनकी जमानत खारिज करा इन्हें वांछित घोषित कराने का भी कोई प्रयास अब तक नहीं किया गया है।