करीब एक महीने बाद दोनों अलग हो गए थे। इसके बाद आरिज ने अपने चाचा खुर्शीद आलम से संपर्क किया। चाचा ने उसे नेपाल में निजामुद्दीन खान उर्फ निजाम खान का नंबर दिया। इस समय वह वाराणसी में था। यहां से बिहार गया और भारत-नेपाल बॉर्डर को पार करते हुए विराटनगर पहुंचा।
निजाम खान की सहायता से इसे नेपाली नागरिकता मिल गई थी। नेपाल में इसने मो. सलीम के नाम से अपना पासपोर्ट बनवाया था। वह नेपाल में पलपा, कपिलवस्तु और गोरखा एरिया में रहा था।
वहां रेस्टोरेंट चलाया और बाद में उसी स्कूल में पढ़ाने लगा, जहां अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर पढ़ाता था। इसके बाद वह तौकीर के साथ सऊदी अरब चला गया था। दोनों वर्ष 2017 में भारत लौटे थे। नेपाल में आरिज ने दूसरी शादी कर ली थी।