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अंकित हत्याकांड: आरोपियों ने 25 महीने तक छकाया, टैटू और नंबर ने पकड़वाया

Sat, 03 Jun 2017 09:56 AM IST
जेपी शर्मा/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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ankit murder case
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बहुचर्चित सॉफ्टवेयर इंजीनियर मेरठ निवासी अंकित हत्याकांड की गुत्थी यूपी एसटीएफ ने सुलझाने का दावा किया है। यूपी एसटीएफ ने दावा किया है कि अंकित की हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने आरोपियों के पास से वारदात में शामिल एक कार और फर्जी नंबर प्लेट भी बरामद कर ली है। 
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उत्तर प्रदेश एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया अंकित की हत्या उनकी एसयूवी कार लूटने के मकसद से की गई थी, लेकिन गोली चलने की आवाज सुनकर घटनास्थल पर कई लोग जमा हो गए थे। इसकी वजह से आरोपी अपनी योजना में कामयाब नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि एक आरोपी को दिल्ली के धौलाकुआं इलाके से तथा दूसरा गाजियाबाद से पकड़ा गया है। 

हत्यारोपियों ने वारदात से पहले और वारदात के बाद योजना बनाकर पुलिस व जांच एजेंसियों को 25 महीने तक छकाया। 26 अप्रैल 2016 को कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने केस की जांच शुरू की। 
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सीबीआई ने मुख्यारोपी शशांक का स्कैच जारी कर उस पर 5 लाख रुपये इनाम की घोषणा की लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगे। अब, एसटीएफ  शशांक जादौन के हाथ के दो टैटू और उसकी होंडा अकॉर्ड कार के वीआईपी नंबर तक तीनों आरोपियों तक पहुंचने और बहुचर्चित केस का खुलासा करने में कामयाब हो गई।     
         
एसटीएफ के मुताबिक, तीसरा हत्यारोपी मनोज कुमार ट्रक व कार मैकेनिक है। उसे कार के इंजन आदि की भी खासी जानकारी है। मनोज की मदद से ही हत्यारोपियों ने कार वारदात के बाद हत्यारोपियों ने पुलिस व जांच टीमों से बचने के लिए मैकेनिक मनोज की मदद से अकॉर्ड कार की प्लेट बदलवार्ई थी। आरोपियों ने वारदात के दौरान कार का नंबर यूपी 14 एबी 2200 के स्थान पर बदलकर यूपी 14 बीए 2300 कर लिया था। 

जांच टीमों ने दिल्ली एनसीआर में चल रहीं सभी होंडा कारों का डेटा प्राप्त कर पड़ताल की थी। इसमें पता चला कि उक्त नंबर नहीं मिली। इससे मिलता जुलता नंबर यूपी 14 एबी 2200 की पड़ताल की गई तो पता चला कि ये कार मालिक ने शशांक जादौन को बेची है। शशांक के हुलिया की पूछताछ की। वारदात के चश्मदीद अंकित के दोस्त गगन ने जांच टीमों को जानकारी दी थी कि हत्यारोपी के हाथ में दो टैटू बने थे। 

इससे कार मालिक के भी कार खरीदार के हाथ में टैटू होने की जानकारी पर टीम को संदेह बढ़ गया। पड़ताल करने पर पता चला कि आरोपी जयपुर में है तो टीम जयपुर पहुंची लेकिन वह वहां से दिल्ली के लिए निकल गया था। टीम ने बृहस्पतिवार को शशांक को दिल्ली के धौलाकुआं से हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने पूरी वारदात की जानकारी दे दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने मनोज को भी गिरफ्तार कर वारदात में प्रयुक्त नंबर प्लेट को भी बरामद कर लिया।       
    

रियल एस्टेट के घाटे ने टॉपर को बना दिया हत्यारोपी लुटेरा        

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 एसटीएफ के मुताबिक, मूलरूप से मेरठ निवासी गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के सीनियर बुकिंग क्लर्क शिवपाल सिंह के 25 वर्षीय बेटे शशांक जादौन बारहवीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर बना था। शशांक पढ़ाई में काफी होनहार था। उसने वर्ष 2014 में दिल्ली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की थी। इसके बाद उसने रियल एस्टेट ब्रोकर का काम शुरू किया और सेक्टर-63 में ऑफिस बनाया था। 

रियल एस्टेट के कारोबार में घाटा होने पर उसने अपने दोस्त शास्त्री नगर गाजियाबाद निवासी पंकज से चार लाख रुपये लिए थे। रुपये नहीं लौटाने के कारण वह दबाव बना रहा था और उसी ने शातिर सिकंदराबाद के निजामपुर निवासी सतपाल उर्फ सत्ते से मुलाकात कराकर फॉच्र्यूनर लूट की योजना बनाई थी। जिसमें नाकाम होने पर उसने अंकित की हत्या कर दी।       
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अंकित हत्याकांड का कुख्यात दुजाना कनेक्शन  

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एसटीएफ ने बताया कि सतेंद्र उर्फ सत्ते कुख्यात अनिल दुजाना का सक्रिय गुर्गा है। पंकज उससे किसी तरह जुड़ा था। सत्ते ने ही शशांक को लूट करने की सलाह दी और उसे वारदात करने की जानकारी भी दी। वारदात से पूर्व व बाद में हत्यारोपियों ने जमकर शराब पी थी और वारदात के बाद कपड़े जूतों को ठिकाने लगा दिया। वारदात में प्रयुक्त पिस्टल पंकज की लाइसेंसी थी। उसे आरोपियों ने गाजियाबाद के बाबा गन हाउस को बेचने की एसटीएफ को जानकारी मिली है। जबकि एक अन्य पिस्टल बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है। 

अब, एसटीएफ एसपी राजनारायण मिश्रा और सीओ राजकुमार मिश्रा की टीम अंकित हत्या कांड के खुलासे के बाद सतेंद्र व उसके अन्य साथियों को भी तलाश रही है। टीम को अंदेशा है कि दुजाना के इशारे पर सत्ते गौतमबुद्धनगर व बुलंदशहर में नए-नए गिरोह से क्षेत्र में कार लूट की वारदात कराकर लूटी गई कारों को ठिकाने लगा रहा है।       
    
एसटीएफ ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सीबीआई को सौंप दिया है। एसटीएफ दोनों आरोपियों के चेहरे मीडिया के सामने नहीं लाई। इस संबंध में एसटीएफ ने बताया कि आरोपियों की अभी शिनाख्त परेड कराई जाएगी। इसके चलते उनके चेहरे सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।    
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