एनजीओ व समितियों से अवैध उगाही के मामले में गिरफ्तार अफसरशाह आनंद जोशी को अदालत ने मंगलवार को जमानत प्रदान कर दी। सीबीआई अदालत ने हालांकि जमानत के साथ कई शर्तें लगाई हैं। सीबीआई ने 15 मई को दिल्ल्ली के तिलक नगर इलाके से गिरफ्तार किया था।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने गृह मंत्रालय के निलंबित अवर सचिव आनंद जोशी को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने 50 हजार के निजी मुचलके व दो जमानती की शर्त पर जमानत दी है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं लेकिन उसे अनिश्चितकाल के लिये जेल में नहीं रखा जा सकता। इसके मद्देनजर जोशी को कुछ शर्तों के साथ जमानत प्रदान की जाती है। अगर आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।
अदालत ने जोशी को निर्देश दिया है कि केस की जांच के दौरान वह गाजियाबाद व दिल्ली से बाहर नहीं जाएंगे, अपना निजी व सरकारी पासपोर्ट सात दिन के भीतर सीबीआई को सौंपेंगे, अपना व अपने परिजनों के मोबाइल नंबर तीन दिनों के भीतर जांच अधिकारी को देंगे और जांच अवधि के दौरान कोई अन्य मोबाइल इस्तेमाल नहीं करेंगे।
एफसीआरए उगाही मामले में किया था गिरफ्तार
आनंद जोशी
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अदालत ने यह भी कहा है कि जोशी प्रत्येक सोमवार को जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी देंगे। जांच अधिकारी के बुलाने पर जोशी उसके सामने पेश होंगे। इसके अलावा वह किसी गवाह को प्रभावित करने और किसी एनजीओ से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने कहा कि उनका मुवक्किल 22 दिन से हिरासत में है। सीबीआई उससे अपनी पूछताछ पूरी कर चुकी है। एजेंसी ने खुद को उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया था।
वह सरकारी अधिकारी है और उसके देश छोड़कर भागने की आशंका नहीं है। अगर पूछताछ के लिए उसकी जरूरत नहीं तो उसे लंबे समय तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर विदेशों से चंदा प्राप्त करने वाली कई एनजीओ को अवैध तरीके से नोटिस जारी कर उगाही करने का आरोप है। आरोपी ने करीब 50-60 एनजीओ को नोटिस जारी किया था।
एजेंसी ने कहा कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह इन एनजीओ से संपर्क करके जांच को प्रभावित कर सकता है। वह गवाहों को भी प्रभावित कर सकता है। इन तथ्यों के मद्देनजर आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
पुत्र की प्रार्थना ने दिलाई जमानत ?
आनंद जोशी
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एजेंसी का आरोप है कि केयर इंडिया, स्नेहालय चेरिटेबल ट्रस्ट, ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर फेडरेशन आदि संस्थाएं एफसीआरए 2010 के तहत विदेशों से फंड प्राप्त कर रहे हैं।
जोशी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उक्त संस्थाओं को नोटिस जारी कर बुलाया और उनसे अवैध तरीके से इन संस्थाओं से उगाही करने का प्रयास किया गया।
सीबीआई ने गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बी के प्रसाद की शिकायत पर 5 मई 2016 को सीबीआई ने आनंद जोशी पर विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) 2010 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
पुत्र की प्रार्थना ने दिलाई जमानत
आनंद जोशी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसकी पत्नी, दो बेटे व अन्य परिजन मौजूद थे। जोशी का छोटा बेटा जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पूरे समय हाथ जोड़कर प्रार्थना करता रहा।
जोशी के दूसरे परिजन कोर्ट की कार्रवाई सुनते रहे लेकिन उसका बेटा ईश्वर से प्रार्थना करता रहा। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि यह जमानत वकीलों की दलीलों से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि आरोपी के बेटे का मासूम चेहरा और ईश्वर से उसकी प्रार्थना की बदौलत दी जा रही है।