एक बार फिर नजफगढ़ इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। निगम पार्षद कृष्ण पहलवान के कार्यालय में शुक्रवार देर रात पार्टी के दौरान एक पीएसओ ने दो अन्य पीएसओ को गोली मार दी।
दोनों को जख्मी हालत में पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मरने वाले एक पीएसओ की पहचान एटा निवासी अशोक कुमार जबकि दूसरा 40 वर्षीय फौजी था।
दोनों कृष्ण पहलवान के परिचित प्रॉपर्टी डीलर के पीएसओ थे। पुलिस ने आरोपी पीएसओ बहादुरगढ़ निवासी जोगिंदर (29) को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद इसे गैंगवार मानने से इनकार किया है।
पुलिस के मुताबिक शुक्रवार रात करीब 11:45 बजे विकास अस्पताल से पुलिस को दो लोगों को गोली लगने की जानकारी मिली। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
‘गालीगलौज’ करने पर आरोपी ने चलाई गोली
घटनास्थल, जहां हुई मौत
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जांच में पुलिस को पता चला कि घटना नजफगढ़ के निगम पार्षद कृष्ण पहलवान के नांगलोई बक्करवाला रोड पर स्थित कार्यालय की पहली मंजिल पर हुई है।
मृतक पीएसओ अशोक बीएसएफ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त लेकर नजफगढ़ के प्रॉपर्टी डीलर मनोज उर्फ मौजा का पीएसओ था। वहीं फौजी धुल सिरसा के गोदारा नाम के शख्स का पीएसओ था। छानबीन के बाद पुलिस को पता चला कि शुक्रवार रात इलाके में तैनात सभी पीएसओ निगम पार्षद कृष्ण पहलवान के कार्यालय की पहली मंजिल पर पार्टी कर रहे थे।
पार्टी के दौरान सभी ने शराब पी। इसी दौरान किसी बात पर कहासुनी होने पर बहादुरगढ़ निवासी जोगिन्दर उर्फ फौजा ने दोनों पीएसओ पर गोली चला दी। नजफगढ़ थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जोगिंदर को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। साथ ही मारे गए फौजी के परिवार वालों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रही है। वहीं अशोक के परिवार वालों को घटना की जानकारी दे दी है।
पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वहीं पुलिस सूत्रों का कहना है कि गालीगलौज करने पर जोगिंदर ने दोनों पीएसओ पर गोली चलाई। पुलिस सूत्रों का यहां तक कहना है कि मरने वाले पीएसओ ने जोगिंदर को जाति सूचक शब्द कहा था। जिसे सुनकर उसने अपना आपा खो दिया और अपनी पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। दोनों पीएसओ को दो-दो गोलियां लगने की बात सामने आ रही है।
‘कृष्ण पहलवान मौके पर नहीं था मौजूद’
घटनास्थल, जहां हुई मौत
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 25 वर्ष पूर्व नजफगढ़, ढिचाऊं कला व मित्रऊं गांव सहित अन्य इलाके में गैंगवार की शुरुआत करने वाला कृष्ण पहलवान पीएसओ के बीच हुई गोलीबारी के समय अपने कार्यालय में मौजूद नहीं था। लेकिन घटना की जानकारी मिलने के बाद वह तुरंत कार्यालय पहुंचा। जहां से पुलिस उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।
बताया जाता है कि कृष्ण पहलवान ने 1992 में उसने अपने ही एक रिश्तेदार रोहतास की हत्या कर दी थी। इस मामले में वह पांच साल तक जेल में रहा था। कृष्ण पहलवान, अनूप बलराज, उदयवीर व विक्की डागर के गिरोह के बीच कई बार गैंगवार हो चुकी है।
इसमें करीब डेढ़ सौ लोगों की जान जा चुकी है। कृष्ण के भाई भरत सिंह के राजनीति में आने और विधायक बनने के बाद कृष्ण पहलवान भी राजनीति में आ गया। वह इलाके से निगम पार्षद चुना गया। राजनीति में आने के बाद से कुछ दिनों तक गैंगवार बंद रही। लेकिन वर्ष 2012 में उदयवीर और झड़ौंदा निवासी विक्की डागर ने भरत सिंह के कार्यालय में उस पर गोलीबारी कर दी। इस हमले में भरत सिंह को गोली लगी लेकिन वह बाल-बाल बच गया।
लेकिन मार्च 2015 में भरत सिंह पर दोबारा हमला किया गया। जिसमें उसकी मौत हो गई। इस हत्याकांड के बाद भरत सिंह के भाई व निगम पार्षद को दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। साथ ही वह निजी पीएसओ भी रखता है।