जर्मन मूल की पूर्व पत्नी से दुष्कर्म मामले में आरोपी को अदालत ने एफआईआर में भारी देरी के मद्देनजर आरोप मुक्त कर दिया है। महिला ने तीन साल बाद इसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाई थी। हालांकि कोर्ट ने आरोपी को धोखाधड़ी के मामले में राहत नहीं दी है।
द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने मामले में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धारा में आरोप तय करने से इंकार करते हुये मुक्त कर दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि के लिये कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है।
अदालत ने एफआईआर में देरी पर कहा कि एक दो दिन की देरी तो समझ में आती है लेकिन इस मामले में केस दर्ज करने में तीन साल की देरी हुई है। एफआईआर में तीन साल की देरी का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है।
अदालत ने कहा कि साक्ष्यों व तथ्यों को परखने के बाद ऐसा नहीं लगता कि आरोपी ने उस अपराध को अंजाम दिया है जिसके लिये उस पर मुकदमा चलाया जा रहा है। आरोपों की पुष्टि के लिये कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है।
कोर्ट ने यह फैसला एक जर्मन महिला की शिकायत पर सुनवाई के बाद सुनाया है। महिला का कहना था कि वह 2001 में भारत आई थी और धर्मशाला में उसकी मुलाकात आरोपी से हुई थी। दोनों ने 2005 में शादी कर ली थी।
शादी के दो साल बाद 2007 में वह दोनों अलग हो गये थे। उसके पांच साल बाद 2012 में फिर से दोनों की मुलाकात हुई और आरोपी ने दोबारा शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाये लेकिन फिर शादी नहीं की।
दिल्ली पुलिस ने महिला की शिकायत पर 2015 में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म व धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।