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ड्रग्स तस्करी में दबोचा अंतरराष्ट्रीय एथलीट, 25 किलो म्याऊं-म्याऊं बरामद

Sat, 18 Feb 2017 12:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देश के लिए कांस्य व रजत पदक जीत चुके एथलीट को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 25.650 किलो पार्टी ड्रग्स म्याऊं-म्याऊं बरामद की गई है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस ड्रग्स की कीमत 50 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। एथलीट ने डिस्कस थ्रो (चक्का फेंक) में भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया में रजत और श्रीलंका में कांस्य पदक जीता है। इसने चोट लगने की वजह वर्ष 2010 में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में ट्रॉयल के दौरान नाम वापस ले लिया था। 

स्पेशल सेल पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव के अनुसार एसीपी अखिलेश्वर स्वरूप यादव की टीम को 11 फरवरी को सूचना मिली थी कि अमनदीप सिंह नाम का व्यक्ति 13/14 फरवरी को पार्टी ड्रग्स की खेप मुंबई से दिल्ली लेकर आएगा।
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मेट्रो शहरों में रेव पार्टियों में इस्तेमाल हो रहा है

पुलिस टीम को ये भी पता लगा कि पार्टी ड्रग्स म्याऊं-म्याऊं का मुंबई, दिल्ली व अन्य मेट्रो शहरों में रेव पार्टियों में इस्तेमाल हो रहा है। ड्रग्स अफ्रीकन महाद्वीप से भारत आती थी। पुलिस टीम ने मुंबई से ड्रग्स लेकर आ रहे अमनदीप सिंह (29) व एथलीट रहे हरप्रीत सिंह (30) को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास स्टेट इंट्री रोड पार्किंग गेट से पकड़ लिया। इनके कब्जे से 25 किलो पार्टी ड्रग्स बरामद की गई। 

जेल रोड, दिल्ली निवासी अमनदीप सिंह ने 12वीं के बाद हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म में डिप्लोमा किया। इस दौरान उसकी राजस्थान निवासी किशन और विकासपुरी, दिल्ली निवासी हनीश उर्फ शिन्यू से मुलाकात हुई।

हनीश व अमन सिंह किशन की महंगी लाइफस्टाइल से प्रभावित था। किशन के कहने पर दोनों उसके ड्रग्स के धंधे में शामिल हो गए। इस गोरखधंधे में ये दोनों जल्द ही अमीर हो गए।

जेल रोड पर ही रहने वाला एथलीट हरप्रीत सिंह भी अमनदीप की लाइफस्टाइल से प्रभावित हो गया। इन दोनों की निशानदेही पर हनीश को विकासपुरी इलाके से 15 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके कब्जे से 650 ग्राम पार्टी ड्रग्स बरामद की गई।
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कांस्य व रजत पदक जीत चुका है हरप्रीत

दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार मूलरूप से मेरठ, यूपी निवासी हरप्रीत सिंह ने वर्ष 2004 में ऑस्ट्रेलिया में हुए यूथ कॉमनवेल्थ खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसने डिस्कस थ्रो में रजत व 2006 में श्रीलंका में हुए सेफ खेलों में कांस्य पदक जीता था। वर्ष 2010 में कॉमनवेल्थ खेलों में चोट लगने से ट्रायल के दौरान नाम वापस ले लिया था।

इस वर्ष राष्ट्रीय एथलीट चैंपियनशीप में भाग लिया था, मगर डोप टेस्ट में फेल होने के कारण इसे बाहर कर दिया गया था। ये यूनिवर्सिटी स्तर पर भी डिस्कस थ्रो का खिलाड़ी रहा है। इसके बाद इसने प्रॉपर्टी डीलर का काम शुरू किया। काम ठीक से नहीं चला तो ये लाइफस्टाइल बदलने के लिए अमनदीप के गिरोह में शामिल हो गया।

कई देशों में फैला हुआ है गिरोह का नेटवर्क
इस अवैध व्यापार का नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ है। इस गिरोह में हर सदस्य का काम अलग-अलग होता है। दुबई में बैठा कैलाश राजपूत व यूके में बैठा किशन गिरोह के सरगना है। पार्टी ड्रग्स अफ्रीकन महाद्वीप से शिपमेंट के जरिए मुंबई आती थी। किशन के साथी मुंबई में ड्रग्स की खेप लेते थे। खेप के मुंबई पहुंचते ही अमनदीप, हनीश व हरप्रीत मुंबई लेने पहुंच जाते थे। कुछ ड्रग्स भारत में सप्लाई होती थी। बाकी यूएई, यूके व यूएसए, मलेशिया आदि देशों में कोरियर के जरिये भेज देते थे। 
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