वर्ष 2005 राजधानी में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में दोषी तारिक अहमद डार ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार के समक्ष दायर अपील में डार के वकील सतीश तमटा ने तर्क रखा कि निचली अदालत ने डार को गलत तरीके से दोषी ठहराया है। उसके खिलाफ मामले में कोई साक्ष्य नहीं है और जांच एजेंसी अपनी बात साबित करने में नाकाम रही है।
निचली अदालत ने 16 फरवरी को मामले में दो आरोपियों मोहम्मद हुसैन उर्फ फजली व मोहम्मद रफीक शाह को सभी आरोपों (भारत के खिलाफ जंग छेडना, हत्या, हत्या का प्रयास आर्म्स एक्ट) से बरी कर दिया है।
वहीं, तीसरे आरोपी तारिक अहमद डार को गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) की धारा 38 व 39 में दोषी करार दिया था। अदालत ने कहा था की तारीक आतंकी संगठनों के साथ जुड़ा हुआ था लेकिन इन धाराओं में 10 साल अधिकतम सजा व जुर्माने का प्रावधान है और वह इतनी अवधि से पहले से ही जेल में काट चुका है।
ऐसे में उसकी यही सजा मानते हुए उसे अब इस मामले में रिहा कर दिया जाए। तारीक पर मनी लॉड्रिंग का एक मामला लंबित है जिसके चलते अभी वह जेल में ही है।
29 अक्तूबर 2005 में धनतेरस के दिन (दीपावली से 2 दिन पहले) आतंकियों ने राजधानी में तीन बम धमाके किए थे। दो धमाके सरोजनी नगर और पहाडग़ंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए जबकि तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ। इसमें 67 लोग की मौत हुई थी और 220 लोग घायल हुए थे।