कहीं ऐसा न हो जो मिठाई आप अपनों के लिए खरीद रहे हैं, वह नकली मावे से तैयार हो। बाहरी जिला पुलिस व दिल्ली सरकार की टीम ने नकली मावा तैयार करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को दबोचकर नकली मावा बनाने वाली फैक्टरी को पकड़ा है।
आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी दिनेश, बृजेश, आबागढ़,फिरोजाबाद निवासी अशोक, अजय और सिकंदरा राव, हाथरस निवासी अरविंद कुमार व मालावन, एटा निवासी रामपाल के रूप में हुई है।
पुलिस की मानें तो यह गैंग सगे भाई दिनेश व बृजेश की देखरेख में चल रहा था। पूठ कलां गांव के घर से पुलिस ने 1000 किलोग्राम नकली मावा बरामद किया है। बरामद मावे से तेज बदबू भी आ रही थी। इसके अलावा मावे को बनाने के लिए गंदे पानी का इस्तेमाल किया जा रहा था। मावे के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
पिछले चार माह से बन रहा था मावा...
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बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त एम.एन तिवारी ने बताया कि मंगलवार को उनकी टीम को सूचना मिली थी कि पूठकलां गांव के एक मकान में नकली मावा तैयार किया जा रहा है। सूचना के बाद सुल्तानपुरी थाना पुलिस ने एसडीएम रोहिणी, तपन झा, तहसीलदार, अमित सिंह, डीओ फूड सेफटी सतीश गुप्ता और एफएसओ फूड एंड सप्लाई आर.पी सिंह ने मकान नंबर-337 पूठकलां पर छापा मारा। यहां हानिकारक पदार्थों से नकली मावा तैयार करते छह आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया।
पूछताछ के दौरान दिनेश व बृजेश ने बताया कि पिछले चार माह से नकली मावा तैयार किया जा रहा था। नकली मावा तैयार करने के लिए विशेष तौर पर यूपी से कारीगरों को बुलाया गया था। ये लोग सस्ते और हानिकारक पदार्थों से मावा तैयार कर देते थे।
नकली मावे पर 60 रुपये की लागत आती थी जो 150 से 160 रुपये किलो बिकता था। वहीं शुद्ध मावा 200 से 225 रुपये किलो बिकता है। पुलिस सूत्रों की मानें तो सिंथेटिक दूध, गंदे तेल, सूजी और अन्य केमिकल से डोडा बर्फी और कलाकंद बनाई जा रही थी।