दीपांशु फाइनेंसर से मिला
दीपांशु बहादुरगढ़ के मनोज पंडित नामक फाइनेंस से मिला। दीपांशु ने भी अपने पैसे उसके पास लगा दिए। प्रदीप कासनी ने वर्ष 2017 में काला साहूवासिया की हत्या कर दी थी। इसके बाद गिरोह की कमान उसके भाई पंकज साहूवासिया ने संभाल ली थी। पंकज ने दीपांशु को भूपेंद्र से मिलवाया था। भूपेंद्र ने किसी अमित की हत्या कर दी थी। इस केस में भूपेंद्र को उम्र कैद की सजा हुई थी। जेल में बंद भूपेंद्र की जान-पहचान बिल्डर अमित गोयल से हुई। वर्ष 2021 में कोरोना में भूपेंद्र जेल से बाहर पैरोल पर आ गया।
बिल्डर से पिस्टल मांगी थी
दीपांशु को पता लगा कि प्रदीप कासनी जेल से बाहर आने वाला है। ऐसे में भूपेंद्र ने दीपांशु के लिए हथियारों को बंदोबस्त करने के लिए उसे बिल्डर अमित गोयल के पास ले गया। अमित गोयल ने तीन लाख रुपये लेकर एक पिस्टल दे दी। इसके बाद दीपांशु ने नवदीप से दस लाख रुपये लेकर अमित गोयल ने दो पिस्टल और मांगी। बिल्डर पिस्टल देने की बजाय उल्टा धमकाने लग गया था। ऐसे में दीपांशु ने अमित की हत्या की साजिश रच ली। इसमें बागपत के सुमित का सहयोग लिया। बापरौल गांव के सौरभ से एक लाख रुपये में 29 जून को कोरोला कार खरीदी और अमित गोयल की रैकी करना शुरू कर दिया। दो जुलाई को सुमित कोरोला से ज्वालाहेड़ी बाजार पहुंचा और इसके बाद अमित को पांच गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। दीपांशु साथ में था। अमित को उसी पिस्टल से गोली मारी थी जो उससे तीन लाख में खरीदी थी।