अदालत ने अनुचित तरीके से एक आरोपी को 17 दिनों तक जेल में रखने के मामले में चिंता जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को मामले के जांच अधिकारी, एक सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का आदेश दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंदर कुमार जंगाला ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के खिलाफ और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों के विपरीत एजेंसी के कठोर दृष्टिकोण के कारण आरोपी को 17 दिनों की हिरासत अवधि का सामना करना पड़ा है। साथ ही, अदालत ने ओम प्रकाश नामक व्यक्ति को जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि उसकी हिरासत बढ़ाने या उसकी रिहाई की मांग करने वाला कोई आवेदन जांच एजेंसी द्वारा नहीं दिया गया था।
ओमप्रकाश को ईडी ने ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट के अनुपालन में 12 जून को गिरफ्तार किया था और तीन दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद 15 जून को उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गई। 14 दिनों की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद उसे अदालत के सामने पेश किया गया।