उत्तर पश्चिमी दिल्ली निवासी शख्स की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने उसके बेटे को संपत्ति से बेदखल घोषित करने की मांग को आंशिक रूप से खारिज कर दिया।
साथ ही बेटे को पिता के घर में जबरन घुसने और उनकी जिंदगी में दखल देने से मना किया है।
अदालत ने यह फैसला बेटे की गैर मौजूदगी में सुनाया। प्रशासनिक सिविल जज ने कहा कि याची को वसीयत करने का अधिकार है, जिससे भविष्य में प्रतिवादी संपत्ति से बेदखल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अदालत याची के बेटे को संपत्ति से बेदखल घोषित नहीं कर सकती, क्योंकि यह विशेष राहत अधिनियम की धारा 34 के दायरे से बाहर है।