राउज एवेन्यू कोर्ट ने व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के करीबी सहयोगी मनोज अरोड़ा, जिनसे पहले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की गई थी। उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति दे दी है। विशेष न्यायाधीश नीलोफर आबिदा परवीन ने अरोड़ा को 29 दिसंबर, 2024 से 5 जनवरी, 2025 तक परिवार के साथ थाईलैंड की यात्रा करने की अनुमति दी, यह देखते हुए कि उन्हें ईडी की तरफ से दायर किसी भी आरोपपत्र में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था।
आरोप वांछित रक्षा सलाहकार संजय भंडारी की तरफ से कर चोरी के माध्यम से अपराध की आय को लूटने से संबंधित हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अरोड़ा को अप्रैल, 2019 में मामले में अग्रिम जमानत दी गई थी और कहा कि भंडारी के प्रत्यर्पण की प्रतीक्षा करते हुए मामला संज्ञान चरण के बाद भी लंबित है। अदालत ने कहा कि यह बात रिकार्ड में नहीं आई है कि अरोड़ा ने अनुरोध पत्र (विदेश से सहायता) की प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है या यदि उन्हें थाईलैंड की यात्रा करने की अनुमति दी गई तो वे किसी भी तरह से प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेंगे।
न्यायाधीश ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि आवेदक मामले में आरोपी नहीं है और कार्यवाही अभी भी प्रारंभिक चरण में है। ऐसे में आवेदक के विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार में कटौती करने का कोई औचित्य नहीं दिखता। यदि आवेदक के खिलाफ कोई एलओसी (लुकआउट सर्कुलर) जारी किया गया है, तो वह उस अवधि के दौरान निलंबित या फिर वापस ले लिया जाएगा। अरोड़ा के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
विशेष ईडी अभियोजक एनके मट्टा ने दलील का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अरोड़ा पहले भी फरार हो चुका है और अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही जांच में शामिल हुआ है। मट्टा ने कहा कि ईडी जांच के दौरान वह अपने जवाबों में टालमटोल करता रहा। ईडी ने कहा कि वह कई विदेशी अधिकारियों को भेजे गए अनुरोध पत्रों के जवाब में अरोड़ा और अन्य के खिलाफ कुछ महत्वपूर्ण सबूतों का इंतजार कर रहा है। ईडी ने आरोप लगाया कि इस बात की प्रबल संभावना है कि अरोड़ा कानून की प्रक्रिया से बचने के लिए भाग जाएगा और अपराध की आय को लूटने के लिए विदेश में शरण लेगा, जिसका अभी पता लगाया जाना बाकी है।