दो दिन पहले शासन में हुई बैठक में सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वो बिना किसी बाधा के एनसीआरटीसी को जमीन हस्तांतरित कर दें। कागजी कार्रवाई व फंड की व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रिया चलती रहेगी। इसी बीच अब दुहाई में डिपो निर्माण को लेकर भी अगले एक से दो महीने में जमीन संबंधी विवाद को सुलझाने की तैयारी है।
सरकार भी चाहती है कि किसी भी स्तर पर प्रोजेक्ट में देरी न हो। प्रधानमंत्री कार्यालय इस प्रोजेक्ट की स्वयं अपने स्तर पर निगरानी कर रही है। इसी का नतीजा है कि राज्य सरकार भी जमीन संबंधी मामलों को जल्द सुझाने में तत्परता दिखा रही है।
15 साल तक देखरेख करेगी बॉम्बार्डियर
टेंडर की शर्तों के हिसाब से बॉम्बार्डियर डिलीवरी की तिथि से अगले 15 वर्षों तक रखरखाव भी करेगी। मेरठ में तीन-तीन बोगी वाली मेट्रो चलाई जाएगी। जबकि शुरुआती चरण में हाईस्पीड ट्रेन में छह बोगी लगी होंगी।
इस तरह से कंपनी 30 ट्रेनों की 180 बोगी देगी और 10 मेट्रो ट्रेन की 30 बोगी उपलब्ध कराएगी। हालांकि मेरठ में मेट्रो सर्विस का संचालन वर्ष 2025 तक शुरू किए जाएगा। क्योंकि उस रूट का निर्माण तीसरे चरण में किया जा रहा है, जिसमें अभी समय लगेगा।
सीपीआरओ-एनसीआरटीसी सुधीर शर्मा ने बताया कि हाईस्पीड ट्रेन का काम तेजी से चल रहा है। ट्रेन निर्माण को लेकर टेंडर हो चुका है। पूरी तरह से ट्रेन का निर्माण गुजरात में होगा। पहली ट्रेन वर्ष 2022 में मिल जाएगी।
इसके बाद करीब 10-11 महीने का ट्रायल चलेगा। उधर, प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में दुहाई से शताब्दीनगर के बीच कंस्ट्रक्शन का काम एलएंडटी कंपनी ने शुरू कर दिया है।