एम्स के ट्रामा सेंटर में तैयार हो रहा देश का पहला हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर (ओटी) जल्द शुरू होगा। इसके बनने के बाद अति गंभीर मरीजों को एक जगह पर सभी आधुनिक इलाज की सुविधाएं मिलेंगी। इससे ऐसे मरीजों को भी बचाना आसान होगा, जिनके लिए एक-एक पल महत्वपूर्ण होता है। मरीजों की जटिलता को देखते हुए सभी जरूरी जांच की सुविधा ओटी में ही उपलब्ध करवाई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अति गंभीर मरीजों को ओटी टेबल से हटाना मुश्किल होता है। इससे देखते हुए हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर में एक जगह पर ही सारी आधुनिक जांच की सुविधाएं तैयार की गई है। अब मरीज को ऑपरेशन टेबल से हटाने की जरूरत नहीं होगी। इस सुविधा को 40/40 फीट के कमरे में विकसित किया गया है। ऑपरेशन टेबल तक सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांच मशीनों को लाने के लिए ट्रैक बिछाई गई है।
इसके अलावा इसी ओटी में इंटरवेंशन के प्रोसीजर की व्यवस्था रहेगी। इसमें मरीज के अंदर तार के जरिये किसी ब्लॉकेज को खोलना हो या बेहतर तरीके से अंदर के हालात को समझना हो तो ये काम भी ओटी टेबल पर किया जा सकेगा। इससे तुरंत और बेहतर सर्जरी करना संभव हो सकेगा। ऐसा होने से अति गंभीर मरीज को बचाना भी आसान हो जाएगा। अभी तक ऐसे मरीजों का ऑपरेशन रेड जोन में बने इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में हो रहा है। इसमें कई ऐसे मरीज होते हैं जिनकी पल्स तक नहीं मिल पाती और इन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है।
12 हो जाएंगे ऑपरेशन थियेटर
एम्स ट्रामा सेंटर में हाइब्रिड ऑपरेशन थियेटर शुरू होने बाद ओटी की संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी। सेंटर में अभी पांच सामान्य ओटी चल रहे हैं। इसके अलावा रेड जोन में एक अतिरिक्त ऑपरेशन थियेटर भी चल रहा है। मरीजों की संख्या को देखते हुए पांच मॉड्यूलर ओटी भी बनाए जा रहे हैं।
गंभीर मरीज को मिलेगी बेहतर सुविधा
एम्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूकी का कहना है कि हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर जल्द तैयार हो जाएगा। इसे एक साल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यह बेहद गंभीर मरीजों को भी बेहतर और तुरंत उपचार मिल सकेगा। यहां पर सड़क हादसों व अन्य तरीके से घायल होकर हर दिन काफी मरीज एम्स के ट्रामा सेंटर पहुंचते हैं। इन मरीजों के लिए दो जोन बनाए गए हैं। रेड जोन में 16 बेड हैं। इसमें गंभीर मरीजों को रखा जाता है। वहीं, यलो जोन में 25 बेड हैं इनमें कम गंभीर मरीजों को रखा जाता है। ट्रामा सेंटर में 250 बेड की व्यवस्था है।