अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई तस्वीरों में एक पेड़ की जड़ों पर कंक्रीट डाला जा रहा है। याची ने आरोप लगाया कि मामले में पेड़ों के संरक्षण पर न्यायिक आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता आदित्य एन प्रसाद ने कहा कि रोहिणी में केएन काटजू मार्ग पर गहरी खाई खोदने की गतिविधि और सड़कों की खुदाई करते हुए अधिकारियों ने खड़े पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है और नुकसान करना जारी है।
संबंधित वृक्ष अधिकारी की ओर से पेश अधिवक्ता शादान फरास्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ता से सहमत हैं और वर्तमान स्थिति अस्वीकार्य है। उन्होंने बताया कि वृक्ष अधिकारी ने पीडब्ल्यूडी पर जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने उनके तर्क से असहमति जताते हुए पूछा आप कब तक जुर्माना लगाते रहेंगे?
याचिकाकर्ता के वकील बोले- एक अन्य मामले में अदालत के आदेश का उल्लंघन
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वर्तमान मामला सरासर अदालत की अवमानना का है क्योंकि यह कुछ पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के एक अन्य मामले में पारित आदेश के उल्लंघन से संबंधित है। उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेश हैं जो पेड़ों के चारों ओर एक मीटर कच्चे स्थान को छोड़ना जरूरी है उस पर कोई निर्माण गतिविधि नहीं की जा सकती। जनवरी में अन्य अवमानना मामले से निपटने के दौरान अदालत ने पीडब्ल्यूडी को अपने सभी चल रहे कार्य में उचित सावधानी बरतने के लिए कहा था।
याचिका में कहा गया है वर्तमान मामले में में पेड़ों से एक मीटर के दायरे में गहरी खाई खोदने का काम शामिल है, जो उक्त निर्णय/आदेशों और दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 (डीपीटीए) के प्रावधानों का उल्लंघन है। उपरोक्त स्थल पर पूर्वोक्त गतिविधि के जारी रहने के कारण खड़े पेड़ों की जड़ों को नुकसान अपरिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने बार-बार उल्लंघन की सूचना दिए जाने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया है। वकील ने यह भी दावा किया कि दिल्ली पुलिस भी उसी के संबंध में शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की।