अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जीएसटी दरों में कमी के बाद उपभोक्ताओं को कीमतों में प्रत्यक्ष राहत देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कंपनियां उत्पादों की मात्रा बढ़ाकर या प्रमोशनल ऑफर देकर टैक्स कटौती का लाभ छिपा नहीं सकतीं। यह फैसला उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और शैल जैन की पीठ ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी का असली फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। यह फैसला जीएसटी परिषद के हालिया बदलावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिसमें 22 सितंबर से दो मुख्य दरें 5 और 18 फीसदी लागू की गई हैं, साथ ही विलासिता वस्तुओं पर 40 फीसदी की दर रखी गई है।