दूसरे लोकसभा चुनाव से दिल्ली में क्लीन स्वीप होने की शुरुआत हुई थी। इस चुनाव में सभी चारों लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। पहले लोकसभा चुनाव में तीन लोकसभा क्षेत्रों में चार में तीन उम्मीदवार कांग्रेस के जीते थे, लेकिन दूसरे चुनाव में चार लोकसभा क्षेत्रों में पांचों उम्मीदवार कांग्रेस के चुने गए थे। इस तरह कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था।
इस चुनाव में दिल्ली में लोकसभा क्षेत्रों की संख्या तीन से बढ़ाकर चार की गई थी। दिल्ली शहर क्षेत्र का विभाजन करके चांदनी चौक क्षेत्र बनाया गया था। वहीं, दिल्ली शहर क्षेत्र का नाम बदलकर दिल्ली सदर किया गया था, मगर बाहरी दिल्ली क्षेत्र से पहले चुनाव की भांति दूसरे चुनाव में भी दो सांसद चुनने की परंपरा कायम रही थी। इस बार भी इस सीट पर सामान्य श्रेणी के साथ-साथ एक अनुसूचित जाति श्रेणी के सांसद चुने गए थे।
तीन उम्मीदवारों का खाता भी नहीं खुला था
दूसरे चुनाव में तीन उम्मीदवारों का खाता भी नहीं खुल सका था। इन उम्मीदवारों में एक निर्दलीय उम्मीदवार वह था जिसने पहले लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमाई थी। इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के दौरान मनमोहन सहगल दूसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सहगल को एक भी वोट नहीं मिला था। उनकी भांति दिल्ली सदर सीट से चुनाव लड़े जगन नाथ नाम के दो उम्मीदवारों का भी खाता नहीं खुल सका था।
दूसरे चुनाव का परिणाम
क्षेत्र जीते दल
नई दिल्ली सुचेता कृपलानी कांग्रेस
चांदनी चौक राधा रमन कांग्रेस
दिल्ली सदर चौ. ब्रह्मप्रकाश कांग्रेस
बाहरी दिल्ली सीके नायर कांग्रेस
नवल प्रभाकर कांग्रेस
दूसरे चुनाव से दलबदल की हुई थी शुरुआत
इस चुनाव से दिल्ली में नेताओं ने दलबदल की शुरुआत हुई थी। पहले चुनाव में नई दिल्ली क्षेत्र से किसान मजदूर प्रजा पार्टी से चुनाव जीती सुचेता कृपलानी ने दूसरा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरी और पहले चुनाव की तरह दूसरी बार भी जीतने में कामयाब हुई। कांग्रेस ने बाद में उनको यूपी का सीएम भी बनाया था।
30 उम्मीदवारों ने आजमाई थी किस्मत
उधर, इस चुनाव में नेताओं के साथ-साथ मतदाताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। लिहाजा चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हुआ था। इस चुनाव में 30 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी, उनमें 17 उम्मीदवार निर्दलीय थे। इसके अलावा मत प्रतिशत में भी इजाफा हुआ था। इस चुनाव में 61 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। वहीं, पहले चुनाव की तरह दूसरे चुनाव में भी उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला नहीं हुआ था। चारों क्षेत्रों में पांचों उम्मीदवार आसानी से जीत गए थे। भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार तीन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन बाहरी दिल्ली क्षेत्र में उसके उम्मीदवार काफी पीछे रह गए थे।
30 में से 21 उम्मीदवारों की जमानत हुई थी जब्त
दूसरे चुनाव में 30 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, इनमें से 21 उम्मीदवार जमानत बचाने लायक भी मत प्राप्त नहीं कर सके थे। इन उम्मीदवारों में जनसंंघ व सीपीआई के उम्मीदवार भी शामिल थे। बाहरी दिल्ली क्षेत्र में हार का सामना करने वाले सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।