दवा वर्ष 2026 तक तैयार हो जाएगी। इस दवा को सर्जरी व इंजेक्शन के माध्यम से कैंसर प्रभावित जगहों पर दिया जाएगा। फिलहाल, ब्रेन ट्यूमर और लिवर कैंसर के लिए तैयार हो रही दवा टेबलेट व लिक्विड फॉर्म में है। यदि ब्रेन में ट्यूमर 2 एमएम से छोटा है तो सर्जरी करके टेबलेट उक्त जगह पर लगाई जाएगी जो करीब एक माह तक दिमाग में रहकर कैंसर के सभी सेल को मार देगी और दवा अपने आप ही खत्म हो जाएगी। वहीं, ब्रेन में ट्यूमर 6 एमएम से ज्यादा है तो इंजेक्शन के माध्यम से लिक्विड फॉर्म में दवा को इंजेक्ट किया जाएगा, जो ट्यूमर सेल को धीरे-धीरे खत्म कर देगा। वहीं, लिवर में भी इसी विधि से दवा दी जाएगी।
दवा सीधे प्रभावित जगह पर असर करेगी
नैनो तकनीक के माध्यम से कैंसर प्रभावित जगहों पर सीधे दवाएं देने से कैंसर की हैवी मेडिसन का साइड इफेक्ट घटेगा। अभी जो दवाएं दी जाती हैं वह ब्लड व अन्य कोशिकाओं के साथ मिलकर प्रभावित जगहों पर असर करती हैं। इसमें दवाओं का असर उन जगहों पर भी जाता है जहां पर कैंसर नहीं है। इससे मरीज को नुकसान होता है। नई तकनीक में दवा सीधे प्रभावित जगह पर असर करेगी, जिससे कैंसर की दवाई का निगेटिव असर घटेगा।
जानवरों पर हो चुका है परीक्षण
कैंसर की रोकथाम के लिए तैयार किए जा रही इस दवा का परीक्षण जानवरों पर हो चुका है। चरणबद्ध तरीके से इस दवा का परीक्षण चूहे, खरगोश, सुअर सहित अन्य छोटे-बड़े जानवरों पर किया जा चुका है। अभी तक का ट्रायल सफल रहा है। सभी जानवरों पर इसके परिणाम बेहतर आए हैं। ट्रायल के लिए इस्तेमाल किए गए यह सभी जानवर अमृता अस्पताल की लैब में ही रखे हुए हैं। इन जानवरों पर करीब एक साल तक परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद डेटाबेस के आधार तैयार रिपोर्ट से मनुष्य पर ट्रायल की मंजूरी मिली है।
दवा से भविष्य में होने वाले कैंसर की आशंका खत्म होगी
नैनो तकनीक से तैयार हो रही मेडिसन के बारे में अमृता स्कूल ऑफ नैनोसाइंसेस एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन, कोच्चि के प्रोफेसर डॉ. मंजूर ने बताया कि नैनो तकनीक से तैयार होने वाली यह दवा कैंसर के मरीजों को काफी राहत देगी। साथ ही, भविष्य में फिर से होने वाली आशंकाओं को भी खत्म कर देगी। कई बार कैंसर में इलाज के बाद भी फिर से ट्यूमर होने की आशंका रहती है, जबकि इस दवा से उन सेल को भी खत्म कर दिया जाएगा जो भविष्य में कैंसर कर सकता है। इसके अलावा यह दवा सीधे प्रभावित क्षेत्र पर असर करती है जिससे शरीर के दूसरे हिस्से में होने वाले नेगेटिव असर भी खत्म हो जाते हैं। नैनो तकनीक से तैयार होने वाली दवा की डोज सामान्य दवा के मुकाबले एक तिहाई ही दी जाएगी जिससे मरीज को कैंसर की कम दवाई लेनी पड़ेगी।
25 लोगों पर होगा ट्रायल
कोच्चि स्थित अमृता आयुर्विज्ञान संस्थान में आने वाले 25 कैंसर के मरीजों पर इस दवाई का ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल के दौरान मरीजों पर होने वाले दवा के प्रभाव, उसका रिएक्शन, सकारात्मक प्रभाव व अन्य का परीक्षण किया जाएगा। ट्रायल के डेटाबेस परिणाम आने के बाद आगे की कार्य योजना तैयार की जाएगी।