निजी स्कूलों ने नर्सरी दाखिले के लिए इस बार भी मैनेजमेंट कोटे के तहत 20 फीसदी सीटें तय की हैं। सामान्य श्रेणी की सीटों से अलग इन सीटों को मैनेजमेंट कोटे के नाम पर आरक्षित किया है। यह कोटे की सीटें दाखिले में अभिभावकों को उलझा रही हैं।
स्कूलों ने मैनेजमेंट कोटे की सीटों से अलग स्टॉफ कोटे की सीटें तय की हैं। वहीं कई स्कूल मैनेजमेंट कोटे के अंक भी दे रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर सामान्य श्रेणी के अभिभावकों पर पड़ रहा है क्योंकि ऐसा होने से उनकी सीटें कम हो रही हैं।
नर्सरी की रेस में विद्यादीप पब्लिक स्कूल ने मैनेजमेंट कोटे के लिए 10 अंक, मोनॉर्क पब्लिक स्कूल ने 20 अंक तय किए हैं। अभिभावकों का सवाल है कि इन सीटों पर किनका दाखिला होता है। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि मैनेजमेेंट कोटे व स्टॉफ कोटे के कारण अभिभावक परेशान हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि मैनेजमेंट कोटे में स्टॉफ शामिल नहीं है। कुछ स्कूलों ने पांच फीसदी सीटें स्टॉफ के लिए तय की हैं। इस तरह से सामान्य की सीटें कम हो रही हैं। मसलन किसी स्कूल में 100 सीटें हैं तो 25 फीसदी ईडब्लयूएस की निकाल कर बची 75 सीटें।
इन सीटों में 20 फीसदी मैनेजमेंट की सीटें और फिर पांच फीसदी स्टॉफ कोटे की। इस तरह से सामान्य श्रेणी के लिए महज 50 फीसदी सीटें ही बच रही हैं। स्कूलों को मैनेजमेंट कोटे में ही स्टॉफ कोटे को शामिल करने के लिए कहा गया था। लेकिन स्कूलों ने मनमानी करते हुए स्टॉफ केलिए सीटें अलग से तय की हैं।
वहीं कुछ स्कूल मैनेजमेंट कोटे केलिए भी अंक दे रहे हैं। सुमित ने बताया कि ऐसा करके स्कूल सीधे तौर पर शिक्षा निदेशालय केनियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। अभिभावकों को राहत देते हुए शिक्षा निदेशालय को ऐसे स्कूलों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।