कुछ दिन बात विजय ने पासपोर्ट बनाने के लिए उस डिग्री का इस्तेमाल किया तो पता चला कि वह फर्जी है। इसके बाद पीड़ित ने हरिनगर थाने में मामला दर्ज करवाया।
निरीक्षक अजय करण शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी जांच कर पंकज अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी डिग्री का रैकेट चला रहा है।
उसके दोनों सहयोगी सर्टिफिकेट तैयार करने और उसकी छपाई करते हैं। इसके बाद पुलिस ने पवित्तर सिंह (40) को कड़कड़डूमा व गोपाल कृष्ण(40) को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया।
गोपाल कृष्ण लुधियाना में प्रिंटिंग प्रेस चलाता था। जहां फर्जी डिग्री की छपाई होती थी।
लोगों को अपने झांसा में लेने के लिए गैंग के सरगना कई शैक्षणिक संस्थानों के नाम से फर्जी वेबसाइट चला रहे थे। मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रबंधन सहित विभिन्न राज्यों के सेकेंडरी बोर्ड के नाम पर वेबसाइट बनाई गई थी।
डिग्री की सत्यता जानने के लिए आरोपी पीड़ितों को वेबसाइट पर जाकर देखने के लिए कहते थे। वेबसाइट को इतनी कुशलता से चलाया जाता था कि लोगों को असली और नकली में फर्क महसूस नहीं होता था।
जिन संस्थानों की वेबसाइट का पता चला है वह उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सहित अन्य राज्य में स्थित है।
जांच में पता चला कि गैंग के एजेंट पूरे देश में फैले हैं। एजेंट लोगों से मोटी रकम वसूलते हैं जबकि गैंग को डेढ़ से दो हजार रुपये देता था।
गिरोह का सरगना पंकज अरोड़ा दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट है। स्नातक करने के बाद उसने मकान बनाना, प्रॉपर्टी डिलिंग करना, सेल्समैन का काम करने के साथ-साथ अन्य कारोबार में हाथ आजमाया, लेकिन कामयाब नहीं होने पर वह गैंग बनाकर फर्जी डिग्री तैयार करने का काम करने लगा।
उसने एसआरकेएम एजूकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की शुरुआत की और इसके माध्यम से फर्जी डिग्री बेचने लगा। अभी तक पुलिस को उसके कई बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये होने का पता चला है, जिन्हें पुलिस ने फ्रिज कर दिया है।
पुलिस के अनुसार पवित्तर सिंह 12वीं तक पढ़ा है। उसने अपने गांव में स्कूल खोला। इस दौरान उसकी मुलाकात लुधियाना के धरमपाल सिंह और पिल्लौर निवासी बलविंदर से हुई। दोनों फर्जी डिग्री बनाने में शामिल थे।
पवित्तर भी उनके साथ काम करने लगा। वर्ष 2014 में दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाना पुलिस ने पवित्तर को गिरफ्तार किया था। वहीं लुधियाना निवासी गोपाल कृष्ण आठवीं फेल है और प्रिंटिंग प्रेस चलाता है।