जर्मनी के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय स्टाइनबाईस यूनिवर्सिटी बर्लिन ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एशिया में मास्टर्स डिग्री की शुरुआत की है। यह कोर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए भारत में लाया गया है। इस कोर्स का पहला सत्र इसी वर्ष से शुरू होगा।
इस डिग्री से विद्यार्थियों में तकनीकी ढांचे को सुदृढ़ और विकसित करने में मदद मिलेगी। इस कोर्स को करवाने के लिए देश के लगभग 48 विश्वविद्यालयों सहमति है। बता दें कि यह कोर्स स्टाइनबाईस ग्लोबल इंस्टीट्युट ट्युबीनगन (एसजीआईटी) संचालित करेगा जो अपने विषेशज्ञ को भारत भेज कर यहां के प्रोफेसर्स को इस कोर्स की ट्रेनिंग देगा और आईवोरी एज्युकेशन के सहयोग से पूरे एशिया में इस कोर्स को विस्तारित भी किया जाएगा। इस कोर्स की विवरणिका www.ivoryeducation.com और www.steibeis.education पर निशुल्क उपलब्ध है।
एसजीआईटी और प्रोग्राम के निदेशक प्रो. बरट्राम लोहमुलर का कहना है कि 'मेक इन इंडिया एक ऐसी सशक्त पहल है जिसमें भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में उचित जगह बनाने की ताकत है। इस प्रोग्राम के द्वारा हम पेशेवर लोगों और कंपनियों को ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट के क्षेत्र में उत्कृष्टता विकसित कराने का प्रयास करेंगे। आईटी के क्षेत्र में पूरे विश्व में भारत की भूमिका काबिल ए तारीफ है। इसके द्वारा जिन क्षेत्रों से भारतीय कंपनियों को फायदा होता है, उनमें तकनीकी उत्कृष्टता विकसित करने में भी मदद मिलेगी। इस कोर्स की फीस को भी न्यूनतम रखा गया है।"
आईवोरी एज्युकेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक निदेशक कपिल रामपाल का कहना है कि 'हम इस कोर्स को विकसित करने के लिए पिछले तीन सालों से एसजीआईटी के साथ काम कर रहे हैं। प्रतिभागी अपनी नौकरी छोड़े बिना ही जर्मन मास्टर डिग्री के साथ ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट में ज्ञान और उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं। इस कोर्स को पूरा करने के लिए जर्मनी में रूकने का समय भी हमने बहुत कम रखा है।'
इस कोर्स की खास बातें
-इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए कोई आरक्षण नहीं होगा
-इसमें एडमिशन लेने के लिए किसी भी तरह की 'न्यूनतम प्रतिशत' जैसी कोई अनिवार्यता नहीं है
-पेड प्रोजेक्ट करवाया जाएगा
-कोर्स खत्म होने के बाद 16 माह का जर्मनी जाने के लिए वीजा दिया जाएगा जिसकी मदद से जर्मनी में नौकरी की चाह रखने वाले नौकरी खोज सकें
-डिस्टेंस लर्निंग नहीं होगी
-पूर्ण रूप से प्रायोगिक कोर्स है
-नौकरी करते-करते इस कोर्स को किया जा सकता है
-जो विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर होंगे उनके लिए स्कॉलरशिप का प्रावधान होगा