राजधानी के निजी स्कूलों में नर्सरी में दाखिले की दौड़ जनवरी में शुरू होने जा रही है। इस दौड़ में केजी में दाखिला लेने वालों की राह आसान नहीं होगी, खासकर उन अभिभावकों की राह मुश्किल होगी, जिनके बच्चों का दाखिला बीते साल नर्सरी में नहीं हो पाया था और वह इस साल केजी में बच्चे का दाखिला कराना चाहते हैं।
वहीं स्कूलों में केजी की सीटें कम होना भी परेशानी का सबब बनेगा। केजी के लिए कोई तय दिशा-निर्देश नहीं होने के कारण स्कूल पूरी तरह से अपनी मनमानी करते हैं। दिल्ली में लगभग 250 निजी स्कूलों में ही केजी है। वहीं इनमें से भी कई ऐसे हैं, जो अल्पसंख्यक स्कूलों की श्रेणी में आते हैं।
इन स्कूलों में 50 फीसदी सीटें अल्पसंख्यक के लिए तय होती है। वहीं कुछ स्कूलों के प्ले स्कूल भी चलते हैं, जिसमें नर्सरी होती और उन्हीं बच्चों को उनके बड़े स्कूल में केजी में दाखिला मिलता है। केजी में सीटें खाली होने पर ही बच्चों को दाखिला मिल सकता है।
वहीं ऐसे अभिभावकों को परेशानी होगी, जिन्होंने बीते साल नर्सरी में यह सोचकर दाखिला नहीं कराया कि अगले साल केजी में दाखिला करा लेंगे। केजी में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु चार साल व अधिकतम आयु पांच साल तय है।
एडमिशन नर्सरी डॉटकॉम के प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि नर्सरी क्लास लगभग सभी स्कूलों में प्रवेश स्तर की कक्षा होती है, जबकि बेहद कम स्कूल हैं, जहां केजी प्रवेश स्तर की कक्षा है। उन्होंने कहा कि केजी को लेकर कोई तय दिशा-निर्देश नहीं हैं।
शिक्षा निदेशालय नर्सरी के लिए गाइडलाइंस देते समय उन्हें एंट्री लेवल की कक्षाओं पर लागूू करने की बात कहता है। केवल अल्पसंख्यक स्कूलों में ही एंट्री लेवल कक्षा केजी से होती है। ऐसे में यही स्कूल शिक्षा निदेशालय की गाइडलाइंस को मानते हैं।
केजी के लिए कोई तय कैलेंडर भी नहीं होता है। अधिकतर स्कूल दिसंबर से दाखिले शुरू करते हैं और जनवरी तक लेकर जाते हैं। वह कहते हैं कि केजी में सीटें अधिक हों और दाखिले के लिए दिशा-निर्देश तय हों, तभी केजी में दाखिले की परेशानी खत्म हो सकती है।