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बोर्ड को नहीं भेजे शिक्षकों के नाम तो रद्द हो सकती है मान्यता 

Wed, 20 Dec 2017 08:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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CBSE
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को दसवीं व बारहवीं परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका के सही मूल्यांकन के लिए कुशल शिक्षकों की जरूरत है। बोर्ड ने स्कूलों से नौवीं से बारहवीं तक सभी विषयों के शिक्षकों के नाम मांगे हैं।
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यह नाम बोर्ड के पास पांच जनवरी तक भेजने हैं। नाम नहीं भेजने पर स्कूलों पर कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल, सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं की परीक्षा मार्च 2018 में होनी है। बोर्ड की कोशिश है कि इनसे सफल आयोजन के साथ समय पर नतीजे जारी कर दिए जाए।

सीबीएसई की कहना है कि उत्तर पुस्तिकाओं की गुणात्मक और त्रुटि मुक्त मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए अनुभवी और प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है। देखने में आया है कि स्कूल नाम भेजने व शिक्षकों को कार्य मुक्त करने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
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वह बोर्ड के दिशा निर्देशों का पालन भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बोर्ड स्कूलों को संबद्धता नियम 13 उपखंड 4 का हवाला देते हुए कहा है कि बोर्ड द्वारा कहने पर स्कूल हर विषय के लिए कम से कम एक परीक्षक प्रदान करेगा।

यदि स्कूल ऐसा करने में विफल रहते हैं तो सीबीएसई को स्कूल के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का अधिकार होगा। संबद्धता नियम 17.2 (ए) में कहा गया है कि परीक्षा, दाखिले में किसी तरह के कदाचार मामले में बोर्ड द्वारा स्कूल की मान्यता वापस ली जा सकती है।

ऐसे में बोर्ड ने स्कूलों को कहा है कि वह शिक्षक एग्जामिनेशन पोर्टल पर पंजीकरण कराएं। सीबीएसई जिन शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए चुनेगा उन्हें स्कूल के अन्य किसी कार्य में नहीं लगाया जाए। जिससे उनका पूरा फोकस मूल्यांकन पर रहे।
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