दिल्ली विधानसभा में पेश हुई कैग रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास के नवीनीकरण पर बड़े सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, काम की लागत अनुमान से 342 फीसदी ज्यादा बढ़कर 33.66 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल खर्च में से 18.88 करोड़ रुपये सुपीरियर स्पेसिफिकेशन, आर्टिस्टिक और एंटीक इंटीरियर पर खर्च किए गए। इसी वजह से बंगले को विपक्ष ने शीश महल नाम दिया था।
कैग ने पाया कि काम पूरा होने के दो महीने बाद 9.34 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई, जिससे बिना अनुमति खर्च की स्थिति बनी। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टाफ ब्लॉक और कैंप ऑफिस के लिए मंजूर 19.87 करोड़ रुपये में भी गड़बड़ी हुई। स्टाफ ब्लॉक बना ही नहीं। पैसे का इस्तेमाल दूसरी जगह सात सर्वेंट क्वार्टर बनाने में किया गया। कैंप ऑफिस भी पूरा नहीं बन सका और काम बीच में ही रोकना पड़ा। काम के दौरान बिल्डिंग का एरिया 1397 वर्गमीटर से बढ़ाकर 1905 वर्गमीटर कर दिया गया और कई महंगे बदलाव किए गए। एक ही ठेकेदार को 25.80 करोड़ रुपये का काम दे दिया गया। रिपोर्ट में इन सभी मामलों को गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत खामियां बताया गया है।