वहीं, अब योगेश की रिहाई को शांतिपूर्वक किया जाए इसके लिए बीते कई दिनों से पुलिस-प्रशासन के कुछ अधिकारी लगातार संगठन के पदाधिकारियों से संपर्क में थे। इस संबंध में अमर उजाला ने बीते दिनों एक खबर ‘बिना स्वागत जेल से रिहा होगा योगेश’ शीर्ष से प्रकाशित की थी। बृहस्पतिवार शाम करीब 5 बजकर 40 मिनट पर योगेश का रिहाई परवाना जिला कारागार पहुंचा और शुक्रवार सुबह गुपचुप तरीके से उसे रिहा कर दिया गया। जबकि, उसके चाचा और चचेरे भाई को बीते दिनों ही रिहा कर दिया गया था।
जेल के बाहर रही कड़ी सुरक्षा
जिला कारागार से योगेश राज के छूटने पर कोई नारेबाजी, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी या फिर भव्य स्वागत न हो, इसके लिए पुलिस-प्रशासन ने कड़ी व्यवस्था की थी। हाईवे स्थित जिला कारागार के बाहर गाड़ियों की सघन चेकिंग अभियान चला गया। सूत्रों की मानें तो पुलिस किसी भी दशा में योगेश की रिहाई पर स्वागत कार्यक्रम नहीं होने देना चाहती थी।
मात्र तीन लोगों की मौजूदगी में रिहा हुआ योगेश
सूत्रों की मानें तो जिला कारागार से बाहर आने के दौरान योगेश राज को लेने के लिए संगठन के दो पदाधिकारी व एक रिश्तेदार ही साथ थे। जिला कारागार से रिहा होने के बाद योगेश राज विहिप के विभाग मंत्री ब्रूनो भूषण, बजरंग दल के प्रांत सह संयोजक प्रवीण प्रताप भाटी के साथ मुख्यालय स्थित कार्यालय पहुंचा था। जहां लोगों से मुलाकात के बाद वह सीधा अपने गांव के लिए निकल गया था।
बवाल को योगेश ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
गत तीन दिसंबर को महाव गांव में हुई गोकशी की घटना के बाद चिंगरावठी पुलिस चौकी पर हुए बवाल में नामजद आरोपी व बजरंग दल का जिलाध्यक्ष योगेशराज जेल से रिहाई के बाद अपने घर पहुंचा। घर पहुंचने पर परिवारीजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। योगेशराज का कहना है कि चिंगरावठी बवाल की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उसका इस घटना से कोई लेना देना नहीं है। योगेशराज ने बताया कि उसे न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उसने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह व युवक सुमित की मौत पर भी गहरा दुख जताया। दोपहर बाद योगेशराज के अपने पैतृक गांव नयाबांस मजरा साहनपुर में पहुंचने पर परिवारीजनों में खुशी की लहर दौड़ गई।